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बच्चों के कोविड-19 टीके के लिए उन पर परीक्षण किये जाने की जरूरत है

By भाषा | Updated: July 18, 2021 17:05 IST

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(जूडी मार्टिन, प्रोफेसर बाल रोग, पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय)

पिट्सबर्ग (अमेरिका), 18 जून (द कन्वर्सेशन) अमेरिका में जुलाई 2021 के मध्य तक तीन तिहाई वयस्क कोविड-19 टीके की कम से कम एक खुराक ले चुके हैं और ऐसा जान पड़ता है कि जीवन अब काफी हद तक कोविड महामारी से पहले के समय में लौटता नजर आ रहा है।

लोग अब यात्रा कर रहे हैं, रेस्त्रां में दोस्तों के साथ खाना खा रहे हैं, कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और सिनेमा के साथ ही खेलों का लुत्फ उठा रहे हैं। दूसरी तरफ नजर डालें तो उन माता-पिता की चिंता अब भी बरकरार है जिनके बच्चे 12 वर्ष से कम आयु के हैं क्योंकि अब तक ऐसे बच्चे कोविड-19 टीके की खुराक लेने के पात्र नहीं हैं। कई अभिभावक आगामी स्कूल सत्र की शुरुआत होने और आसपास मौजूद वायरस के डेल्टा स्वरूप को लेकर चिंतित हैं।

वहीं, 12 साल से कम उम्र के बच्चों पर नैदानिक परीक्षण के लिए शोध जारी है और इतने छोटे बच्चों के लिए कोविड-19 टीके के उपलब्ध होने में भी अभी माना जाए तो कई महीने लग सकते हैं। ये परीक्षण बेहद जरूरी हैं क्योंकि वयस्कों की तुलना में बच्चों के शरीर संबंधी विज्ञान और टीकों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण अंतर है। 12 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों में अलग-अलग परीक्षण किया जाना महामारी को समाप्त करने की दिशा में अहम कदम है।

बाल संक्रमण रोग की विशेषज्ञ होने के नाते मैं पिछले 20 वर्ष से बच्चों में होने वाले सामान्य संक्रमण और उनके टीकों को लेकर अध्ययन कर रही हूं। यहां पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में स्थित हमारी टीका परीक्षण इकाई में कोविड-19 रोधी टीकों के लिए वयस्कों और बच्चों के नैदानिक परीक्षण किए गए हैं।

पिट्सबर्ग क्षेत्र में हमारी इकाई दो कोविड-19 टीका नैदानिक अनुसंधान परीक्षण स्थलों में से एक थी और पूरे अमेरिका में 100 स्थलों में शुमार थी जिन्हें कोविड महामारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा गठित किया गया था। हमारी टीम 6-11 साल के बच्चों के समूह के साथ परीक्षण के अगले चरण की लगभग शुरुआत करने जा रही है। टीके के सुरक्षित और कारगर होने संबंधी जांच की जाएगी। टीका प्रोटीन का निर्माण कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जिन्हें एंटीबॉडी कहा जाता है जोकि बीमारी से लड़ता है।

एक टीके को आम लोगों पर उपयोग के लिए मंजूरी देने से पहले इसे आमतौर पर नैदानिक ​​सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा जाता है, जिसमें दो से 15 साल तक का समय लग सकता है।

अमेरिकी सरकार के ''वार्प स्पीड'' अभियान ने इस प्रक्रिया को अभूतपूर्व गति प्रदान की, जिसके लिए सरकार ने प्रयोगशाला स्थल, बुनियादी ढांचा निर्माण, अनुसंधान निवेश और टीके की पूर्व खरीद के लिए 18 अरब डॉलर का निवेश किया। दिसंबर 2020 में, अमेरिकी स्वास्थ्यकर्मियों को वयस्कों के लिए मंजूर किए गए टीके की पहली खुराक देना शुरू किया गया।

टीका अनुसंधान का कार्य प्रयोगशाला में शोध के साथ शुरू किया गया, जहां टीकों को विकसित एवं पशुओं पर परीक्षण किया गया। इसके बाद सरकार और दवा कंपनियों ने विकसित किए गए टीकों का पूरी दुनिया में लोगों पर विभिन्न चरणों में परीक्षण शुरू किया।

परीक्षण के पहले चरण में टीके को मनुष्य में सुरक्षित होने को लेकर आंका गया। दूसरे चरण के दौरान, शोधकर्ताओं ने टीके की सुरक्षा का मूल्यांकन जारी रखने के साथ ही वायरस से सुरक्षा देने के लिए टीके की खुराक तय करने पर भी नजर बनाए रखी ताकि शरीर को वायरस से बचाव करने लायक रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके।

इसके बाद जब एक टीके ने परीक्षण के तीसरे चरण में प्रवेश किया तो प्राथमिक उद्देश्य यह रहा कि इसने लोगों को संक्रमण या बीमारी से किस स्तर की सुरक्षा प्रदान की। साथ ही इस दौरान टीके की सुरक्षा एवं संभावित दुष्प्रभावों की भी निगरानी की गई।

एक बार नैदानिक परीक्षण पूरा हो जाने के बाद भी टीकों को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना होता है, जोकि टीके की सुरक्षा और प्रभावशीलता की देखरेख करने वाला नियामक निकाय है।

वर्ष 2020 के कई महीने और 2021 की शुरुआत में हजारों वयस्क लोगों के तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षण में शामिल होने के बाद अमेरिका ने 18 साल एवं उससे अधिक उम्र के समूह के वास्ते तीन कोविड-19 टीकों के आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी प्रदान की। साथ ही केवल फाइजर के टीके को 12 साल एवं उससे बड़े बच्चों के लिए मंजूरी दी गई।

वयस्कों के मुकाबले बच्चों का शरीर किस प्रकार अलग होता है? बढ़ते हुए बच्चों का शरीर कई मायनों में वयस्कों से काफी अलग होता है। उनका दिमाग तेजी से विकास कर रहा होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी काफी फर्क होता है, विशेष रूप से बच्चों और शिशुओं में। नवजात शिशुओं के शरीर में कुछ महीनों तक एंटीबॉडी होती हैं जोकि उन्हें गर्भधारण के दौरान अपनी मां से प्राप्त होती हैं।

ऐसे में कुछ टीके छोटे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उतने कारगर साबित नहीं होते हैं। वहीं, बड़े बच्चों का शरीर बढ़ने के साथ ही उनमें अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित हो चुकी होती है।

ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि बच्चों के कोविड-19 टीके के लिए उन पर परीक्षण किया जाना आवश्यक है। अगर वयस्कों के लिए उपयोग होने वाला एक टीका बच्चों पर सुरक्षित है तो भी उनका शरीर टीके को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है, ये देखना बेहद जरूरी है। वयस्कों को दी जानी वाली खुराक जोकि उन्हें सर्वोत्तम सुरक्षा देती है, उसी खुराक को बच्चों को देने से उन्हें तेज बुखार आ सकता है। ऐसे में हर वर्ग के बच्चों के लिए खुराक तय किया जाना भी आवश्यक तथ्य है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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