चाबहार बंदरगाह परियोजनाः अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, बजट में एक भी पैसा नहीं, आखिर क्यों दूर हो रहा भारत?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 1, 2026 15:30 IST2026-02-01T15:29:36+5:302026-02-01T15:30:46+5:30

Chabahar Port Project: चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी।

Chabahar Port Project US imposes tough economic sanctions Iran not single penny budget why India moving away? | चाबहार बंदरगाह परियोजनाः अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, बजट में एक भी पैसा नहीं, आखिर क्यों दूर हो रहा भारत?

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Highlightsकनेक्टिविटी और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके।माल ढुलाई के लिए 7,200 किलोमीटर लंबी परिवहन परियोजना है।अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं।

नई दिल्लीः केंद्रीय बजट में इस बार चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई। अमेरिका द्वारा ईरान पर नये प्रतिबंध लगाये जाने की पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है। भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी विशाल कनेक्टिविटी परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है। पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी।

यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना से संबंधित मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। ऐसी जानकारी मिली है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर ट्रंप प्रशासन द्वारा 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाये जाने की धमकी के बाद भारत इस परियोजना से संबंधित विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है। भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं ताकि कनेक्टिविटी और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके।

दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। आईएनएसटीसी भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई के लिए 7,200 किलोमीटर लंबी परिवहन परियोजना है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पशु आहार और कपास के बीज की आपूर्ति में लगी सहकारी क्षेत्र की संस्थाओं के लिए कई कर लाभ की रविवार को घोषणा की। अपने सदस्यों द्वारा उत्पादित दूध, तिलहन, फल ​​या सब्जियां संघीय सहकारी समिति और इसी तरह की गतिविधियों में लगे अन्य लोगों को आपूर्ति करने में लगी प्राथमिक सहकारी समिति को लाभ और आय की कटौती की वर्तमान में अनुमति है।

सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा, ‘‘ मैं इस कटौती का विस्तार करके इसमें अपने सदस्यों द्वारा उत्पादित पशु आहार और कपास के बीज की आपूर्ति को भी शामिल करने का प्रस्ताव करती हूं।’’ सरकार नई कर व्यवस्था के तहत अंतर-सहकारी समितियों के लाभांश से प्राप्त आय को कटौती के रूप में स्वीकार करेगी, बशर्ते कि इसे आगे सदस्यों में वितरित किया जाए।

एक सहकारी समिति द्वारा दूसरी सहकारी समिति से प्राप्त लाभांश को पुरानी कर प्रणाली में कटौती के रूप में स्वीकार किया जाता था। नई कर प्रणाली में इस कटौती की अनुमति न होने पर दोहरा कराधान हो सकता है, क्योंकि सहकारी समितियों द्वारा सदस्यों को आगे वितरण किए जाने पर इस पर कर लगाया जा सकता है।

सरकार अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघों द्वारा 31 जनवरी, 2026 तक कंपनियों में किए गए निवेश पर प्राप्त लाभांश आय पर तीन साल की अवधि के लिए छूट भी देगी। उन्होंने कहा, ‘‘ यह छूट केवल सदस्य सहकारी समितियों को वितरित किए जाने वाले लाभांश पर ही लागू होगी।’’ सहकारी समितियों के मामले में, आयकर की दरें 10,000 रुपये तक 10 प्रतिशत, 10,001 रुपये से 20,000 रुपये के बीच 20 प्रतिशत और 20,000 रुपये से अधिक आय होने पर 30 प्रतिशत पर यथावत रहेंगी।

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