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बाइडन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी खर्च योजनाओं को अहम बताया

By भाषा | Updated: September 15, 2021 12:22 IST

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अरवाडा (अमेरिका), 15 सितंबर (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने से लिए अपनी घरेलू खर्च योजनाओं को अहम बताया और इस बात को रेखांकित किया कि उनके स्वच्छ ऊर्जा प्रस्तावों की मदद से किस प्रकार अच्छे वेतन वाली नौकरियां पैदा होंगी।

कोलोराडो में डेनवार शहर के बाहर राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा प्रयोगशाला के फ्लैटिरोंस परिसर की यात्रा के साथ ही राष्ट्रपति का देश के पश्चिमी हिस्से का दो दिवसीय दौरा समाप्त हो गया। इस दौरान बाइडन ने जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुए खतरों से निपटने के लिए अपने खर्च पैकेज को अहम बताया।

बाइडन ने कहा, ‘‘अच्छा समाचार यह है कि मानव द्वारा पैदा की गई समस्या का समाधान मानव कर सकता है।’’ उन्होंने भविष्य में स्वच्छ-ऊर्जा की आवश्यकता को ‘‘आर्थिक अनिवार्यता और राष्ट्रीय सुरक्षा अनिवार्यता’’ बताया। उन्होंने कहा कि अब बर्बाद करने के लिए समय नहीं है तथा हर साल जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और गंभीर होता जा रहा है।

बाइडन ने कहा कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इस साल 100 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान होगा। उन्होंने 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन तक पहुंचने के अपने लक्ष्य को रेखांकित किया।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हम ऐसा कर सकते हैं। हम ऐसे तरीके से यह कर सकते हैं, जिससे अच्छी नौकरियां पैदा होंगी, उपभोक्ताओं एवं कारोबारों की लागत कम होगी और जिससे हम वैश्विक नेता बन सकेंगे।’’

राष्ट्रपति के सोमवार को बोइस, इडाहो, सैक्रामेंटो, कैलिफोर्निया का दौरा किया और जंगल की आग से हुए नुकसान का सर्वेक्षण किया।

बाइडन ने अपने इस दौरे में 1200 अरब डॉलर के द्विदलीय अवसंरचना विधेयक और खर्च संबंधी 3500 अरब डॉलर के अतिरिक्ति पैकेज को उचित ठहराने के लिए क्षेत्र में जंगलों में लगने वाली आग का कई बार जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वयं को स्थिति के अनुकूल ढालने के लिए खर्च किया गया प्रत्येक डॉलर भविष्य की लागतों में छह डॉलर बचाएगा।

बाइडन ने कहा, ‘‘अंतत: इससे फर्क नहीं पड़ता कि किसी प्रांत में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है या रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। आग यह देखकर नहीं लगती या सूखा यह देखकर नहीं पड़ता कि प्रांत में किसकी सरकार है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता... हां, हमारे सामने संकट है, लेकिन हमारे सामने एक अभूतपूर्व अवसर भी है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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