पाकिस्तानी सेना और सहयोगी जमात-ए-इस्लामी ने 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ कत्लेआम किया, अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने कहा-‘‘युद्ध अपराध और नरसंहार’’ माना जाए?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 22, 2026 09:57 IST2026-03-22T09:55:50+5:302026-03-22T09:57:14+5:30

सेना ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित उग्र इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान में ‘‘ऑपरेशन सर्चलाइट’’ नाम से एक व्यापक दमन अभियान शुरू किया, जिसमें नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया।

atrocities committed against Bengali Hindus March 25, 1971 Pakistani Army ally Jamaat-e-Islami war crimes and genocide US Congressman Greg Landsman told House | पाकिस्तानी सेना और सहयोगी जमात-ए-इस्लामी ने 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ कत्लेआम किया, अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने कहा-‘‘युद्ध अपराध और नरसंहार’’ माना जाए?

सांकेतिक फोटो

Highlightsगैर-बंगाली मुसलमान गरीब बस्तियों पर संगठित हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।छह अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा था।हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्यवश नरसंहार शब्द लागू होता है।

वाशिंगटन: अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें मांग की गयी है कि पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को ‘‘युद्ध अपराध और नरसंहार’’ माना जाए। ओहायो से डेमोक्रेट सांसद लैंड्समैन ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे अब विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया और उसकी सेना ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित उग्र इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान में ‘‘ऑपरेशन सर्चलाइट’’ नाम से एक व्यापक दमन अभियान शुरू किया, जिसमें नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया।

इसमें यह भी कहा गया है कि 28 मार्च 1971 को ढाका में अमेरिका के महावाणिज्य दूत आर्चर ब्लड ने वाशिंगटन को ‘‘चुनिंदा नरसंहार’’ शीर्षक से एक टेलीग्राम भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा था, ‘‘पाकिस्तानी सेना के समर्थन से गैर-बंगाली मुसलमान गरीब बस्तियों पर संगठित हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।’’

लैंड्समैन ने बताया कि छह अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा था, जिस पर ढाका वाणिज्य दूतावास के 20 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसे बाद में ‘‘ब्लड टेलीग्राम’’ के नाम से जाना गया। उस टेलीग्राम में कहा गया था, ‘‘लेकिन हमने इस आधार पर हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्यवश नरसंहार शब्द लागू होता है।

एक संप्रभु देश का आंतरिक मामला है।’’ लैंड्समैन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से आग्रह किया गया है कि वह 25 मार्च 1971 को बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करे। प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘‘पाकिस्तानी सेना और उसके इस्लामी सहयोगियों ने धर्म और लिंग की परवाह किए बिना जातीय बंगालियों की हत्या की।

उनके नेताओं, बुद्धिजीवियों, पेशेवरों और छात्रों को मार डाला और हजारों महिलाओं को यौन दासता के लिए मजबूर किया।’’ इसमें यह भी कहा गया है कि ‘‘उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया, जिनके खिलाफ सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और जबरन निष्कासन जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।’’

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि किसी भी जातीय या धार्मिक समुदाय को उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह 1971 में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और नरसंहार के रूप में मान्यता दें।

Web Title: atrocities committed against Bengali Hindus March 25, 1971 Pakistani Army ally Jamaat-e-Islami war crimes and genocide US Congressman Greg Landsman told House

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