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पड़ोसी देशों पर ‘धौंस जमाने’ के चीन के रवैये से अमेरिका चिंतित : व्हाइट हाउस

By भाषा | Updated: February 2, 2021 21:45 IST

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(ललित के झा)

वाशिंगटन, दो फरवरी भारत-चीन सीमा गतिरोध पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में बाइडन प्रशासन ने पड़ोसी देशों पर ‘‘धौंस जमाने’’ की चीन की कोशिशों पर चिंता जताई है और कहा है कि अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।

नये (जो) बाइडन प्रशासन की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अमेरिका सामरिक रूप से अहम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए अपने साझेदारों और सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा।

व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की प्रवक्ता एमिली जे होर्न ने कहा, ‘‘हम स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं। भारत तथा चीन की सरकारों के बीच चल रही वार्ता की हमें जानकारी है और हम सीमा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सीधी वार्ता का समर्थन करना जारी रखेंगे।’’

वह भारतीय भू-भाग में घुसपैठ करने की कोशिश और उस पर कब्जा करने की चीन की हालिया कोशिशों के बारे में पूछे गये सवाल का जवाब दे रही थीं।

उन्होंने सोमवार को कहा, ‘‘चीन द्वारा पड़ोसी देशों को डराने-धमकाने के जारी प्रयासों को लेकर अमेरिका चिंतित है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समृद्धि बढ़ाने एवं सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हम अपने मित्रों, साझेदारों और सहयोगियों के साथ खड़े रहेंगे।’’

भारत-चीन के बीच सीमा पर हुई झड़पों के संबंध में यह बाइडन प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया है। पूर्व उप राष्ट्रपति जो बाइडन ने 20 जनवरी को अमेरिका के 46 वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण की है।

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच पिछले साल पांच मई से सैन्य गतिरोध बना हुआ है। गतिरोध दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य एवं राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ता हुई है। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

चीन के सैन्य शक्ति प्रदर्शित करने के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती स्थिति विश्व के प्रमुख शक्तिशाली देशें के बीच चर्चा एक बड़ा विषय बन गया है। चीन की बढ़ती आक्रमकता को रोकने के लिए अमेरिका ‘क्वाड’ (चार देशों का समूह) का समर्थन कर रहा है।

इस समूह में भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। इसका लक्ष्य मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है। दरअसल, इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में चीन की सैन्य सक्रियता बढती हुई देखने को मिली है।

चीन का दक्षिण एवं पूर्वी चीन सागर में कई अन्य देशों के साथ जलक्षेत्र को लेकर भी विवाद चल रहा है। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कृत्रिम द्वीप पर सैन्य क्षमता बढ़ा ली है।

चीन समूचे दक्षिण चीन सागर पर अपना अधिकार जताता है। लेकिन वियतनाम, मलेशिया, फिलीपीन, ब्रुनेई और ताइवान भी इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते हैं। वहीं, पूर्वी चीन सागर में चीन का जापान के साथ विवाद चल रहा है।

दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में खनिज, तेल और अन्य प्राकृतिक संपदा की प्रचुरता है। यह क्षेत्र वैश्विक कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि अमेरिका इन विवादित जलक्षेत्रों पर कोई दावा पेश नहीं कर रहा है, लेकिन उसने दक्षिण चीन सागर में मुक्त नौवहन तथा विमानों से गश्त की छूट के लिए अपने जंगी जहाजों तथा लड़ाकू विमानों की तैनाती कर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में चीन के दावों को चुनौती दी है।

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले हफ्ते संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘देश के हितों की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह कटिबद्ध है और सतर्क भी है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती भी की गई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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