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डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को तबाह करने की धमकी दी, बिगड़ सकते हैं सीरिया में हालात

By विकास कुमार | Updated: January 14, 2019 18:39 IST

सीरिया में इस वक्त 2000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. सीरिया में कुर्द बल सीरिया सरकार और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को धमकी देते हुए कहा है कि अमेरिका के सीरिया से निकलने के बाद अगर तुर्की ने कुर्द बलों पर हमला किया तो अमेरिका उसे आर्थिक रूप से तबाह कर देगा. हाल ही में आई एक खबर के मुताबिक अमेरिका सीरिया से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है. सीरिया में इस वक्त 2000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ट्रंप ने ट्वीट करते हुए तुर्की को ये धमकी दिया है. सीरिया में कुर्द बल सीरिया सरकार और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे हैं. 

तुर्की को ट्रंप की धमकी 

तुर्की कुर्द बलों को अपने देश की एकता के लिए खतरा मानता रहा है. समय-समय पर तुर्की में अलग कुर्दिस्तान की मांग उठती रहती है. कुर्द बल इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है. लेकिन अमेरिका के सैनिकों को वापस बुलाये जाने के फैसले से उन लोगों को ये डर सता रहा है कि इसके बाद फिर से इस्लामिक स्टेट सर उठा सकता है. सीरिया में असद सरकार को ईरान, तुर्की और रूस का समर्थन हासिल है. 

 

तुर्की नाटो संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य है लेकिन हाल में रूस से बढ़ती उसकी नजदीकियों ने अमेरिकी सामरिक चिंताओं को बढ़ाने का काम किया है. दरअसल तुर्की रूस से एंटी मिसाइल डिफेन्स सिस्टम का डील करना चाहता है. जबकि अमेरिका इस डील के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करवा चुका है. सीरिया में कुर्दिश लड़ाकों को अमेरिकी समर्थन मिलने से भी तुर्की नाराज है.

ट्रंप द्वारा अमेरिकी प्रतिबंधों के एलान के बाद तुर्की के राष्ट्रपति ने पुतिन से टेलीफोन पर बात की और हालात का ब्योरा दिया. इसमें कोई शक नहीं है कि रूस और तुर्की के बीच परवान चढ़ते सामरिक इश्क़ अमेरिकी प्रतिबंधों की असल वजह थे. हाल ही में अमेरिकी पादरी एंड्रू बेनसन को लेकर भी अमेरिका और तुर्की में रिश्ते खराब हो गए थे. अमेरिकी प्रतिबंधों के लगने के कारण तुर्की की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा था.

तुर्की की अर्थव्यवस्था हो सकती है तबाह 

अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी के बाद तुर्की से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. लेकिन इसके बाद सीरिया में हालात खराब हो सकते हैं. पादरी विवाद के समय अमेरिकी प्रतिबन्ध के दबाव में तुर्की की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगी थी. 

अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तुर्की की अर्थव्यवस्था की हालत खराब हो गई थी. पांच साल पहले दो लीरा देकर एक अमरीकी डॉलर ख़रीदा जा सकता था, लेकिन अब एक डॉलर के लिए 6.50 लीरा देने पड़ रहे हैं. बहरहाल उस समय तुर्की के राष्ट्रपति का बयान कि ''उनके पास डॉलर है तो हमारे पास अल्लाह है'' के बयान से लग गया था कि तुर्की अमेरिका के सामने इतनी आसानी से हार मानने वाला नहीं है. 

टॅग्स :डोनाल्ड ट्रंपसीरियाआईएसआईएसरूस
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