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अमेरिका ने भारत को टीकों की सिर्फ 75 लाख खुराक दी, और कदम उठाने की जरूरत : कृष्णमूर्ति

By भाषा | Updated: August 7, 2021 12:13 IST

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(ललित के झा)

वाशिंगटन, सात अगस्त शीर्ष भारतीय अमेरिकी सांसद ने कहा है कि अमेरिका ने भारत को कोविड-19 रोधी टीके की सिर्फ 75 लाख खुराकें दी हैं जो पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे समय में जब दुनिया टीका-प्रतिरोधी कोरोना वायरस के नए स्वरूपों के खतरे का सामना कर रही है, सांसद ने जो बाइडन प्रशासन से वैश्विक टीका कार्यक्रम के तहत भारत के लिए अपनी सहायता बढ़ाकर इस संबंध में और कदम उठाने का अनुरोध किया।

सांसद राजा कृष्णमूर्ति का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ साझेदारी जारी रखने को लेकर ‘‘तत्पर’’ है और टीके समेत अन्य सहायता मुहैया कराना चाहता है। कृष्णमूर्ति को भारत और अन्य देशों के लिए अमेरिकी वैश्विक टीका सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करने के प्रयासों में संसद के 116 सदस्यों का समर्थन मिला है।

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका ने भारत को कोविड-19 रोधी टीके की सिर्फ 75 लाख खुराक आवंटित की है।’’ कृष्णमूर्ति ने एक बयान में कहा, ‘‘मैं एक बार फिर राष्ट्रपति बाइडन और कांग्रेस में अपने सहयोगियों से आग्रह कर रहा हूं कि मानवता की भलाई की खातिर इस महामारी को समाप्त करने के लिए एक साथ आएं और नोविड (नलिफाइंग ऑपरच्यूनिटीज फॉर वेरिएंट्स टू इन्फेक्ट एंड डेसिमेट) अधिनियम को कानून में बदलें क्योंकि जब तक किसी भी देश में इसका प्रकोप जारी रहेगा, पूरी दुनिया को टीका प्रतिरोधक वायरस के नए स्वरूप के खतरे का सामना करना पड़ेगा।’’

डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ने कहा, ‘‘भारत का स्वतंत्रता दिवस करीब है, हमें इस महामारी को वास्तव में समाप्त करने के लिए आवश्यक अरबों टीकों के उत्पादन और वितरण के लिए जरूरी वैश्विक साझेदारी बनाकर कोविड से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करने की आवश्यकता है।’’ कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अमेरिका और भारत समेत दुनिया के प्रमुख लोकतंत्रों और इन जीवन रक्षक टीकों के उत्पादकों के बीच निरंतर सहयोग की जरूरत है।’’

राजा कृष्णमूर्ति ने सांसद जेफ मर्कले, एलिजाबेथ वारेन और भारतवंशी महिला सांसद प्रमिला जयपाल के साथ मिलकर नोविड अधिनियम पेश किया जिसके तहत महामारी के संदर्भ में वैश्विक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया पर नजर रखने के लिए अमेरिका महामारी तैयारी और प्रतिक्रिया कार्यक्रम (पैनपीआरईपी) तैयार करेगा।

पैनपीआरईपी विदेश विभाग, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र, खाद्य और औषधि प्रशासन, जैव चिकित्सा उन्नत अनुसंधान और विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य संसाधन और सेवा प्रशासन, रक्षा विभाग, पीस कोर और श्रम विभाग के बीच प्रयासों का समन्वय करेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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