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अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में आतंकी हमला, 15 बच्चों की मौत, 20 घायल

By सतीश कुमार सिंह | Updated: December 18, 2020 21:36 IST

अफगानिस्तान के गजनी प्रांत के गिलान जिले में कुरान पढ़ रहे लोगों पर आतंकियों ने हमला कर दिया। इस हमले में 15 की मौत हो गई।

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ठळक मुद्देअभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।24 नवंबर को अफगानिस्तान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बामयान में लगातार दो भीषण विस्फोट हुए थे।शांति समझौते पर चल रही वार्ता के बीच अफगानिस्तान में इस तरह के हमले काफी तेज हो गए हैं।

काबुलः पूर्वी अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में शुक्रवार को रिक्शे में छिपाकर रखे गए बम में विस्फोट होने से उसकी चपेट में आए 15 बच्चों की मौत हो गई जबकि अन्य 20 घायल हो गए।

यह विस्फोट जिस इलाके में हुआ, वह तालिबान द्वारा नियंत्रित है। गजनी प्रांत के गवर्नर के प्रवक्ता वहीदुल्लाह जुमाजादा ने बताया कि हमला दोपहर को गिलान जिले में हुआ। उन्होंने बताया कि बम धमाका उस समय हुआ जब चालक मोटर चालित रिक्शे के साथ सामान बेचने के लिए गांव में दाखिल हुआ और जल्द ही बच्चों ने उसे घेर लिया।

जुमाजादा के मुताबिक हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। तत्काल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। प्रवक्ता ने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि बच्चों को क्यों निशाना बनाया गया। हालांकि तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने मीडिया को एक संदेश भेज कर दावा किया कि बच्चों ने इलाके में पड़ा ऐसा विस्फोटक उठा लिया था जिसमें पहले विस्फोट नही हुआ था।

बच्चे उस विस्फोटक को व्यापारी के पास लेकर आए थे। मुजाहिद ने कहा कि 12 बच्चों की मौत हुई है। परस्पर विरोधी रिपोर्टों की पुष्टि नहीं हो सकी है क्योंकि तालिबान के नियंत्रण वाला वह क्षेत्र पत्रकारों की पहुंच से दूर है। उल्लेखनीय है कि दो दशक पुराने युद्ध की समाप्ति के लिए कतर में अफगानिस्तान की सरकार और चरमपंथी तालिबान के वार्ताकारों के बीच जारी वार्ता के बावजूद हाल के महीनों में हिंसा की घटनाएं बढ़ी है।

तत्काल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है

तत्काल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। प्रवक्ता ने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि बच्चों को क्यों निशाना बनाया गया। उल्लेखनीय है कि दो दशक पुराने युद्ध की समाप्ति के लिए कतर में अफगानिस्तान की सरकार और चरमपंथी तालिबान के वार्ताकारों के बीच जारी वार्ता बावजूद हाल के महीनों में हिंसा की घटनाएं बढ़ी है।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका के ज्वांइट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले ने मंगलवार को दोहा में तालिबान के नेताओं के साथ बिना पूर्व में घोषणा किए, एक बैठक कर अमेरिका-तालिबान समझौते के सैन्य पहलुओं पर चर्चा की है।

समझौते का उद्देश्य तालिबान और अफगानिस्तान की सरकार के बीच सीधी शांति वार्ता के लिए मंच तैयार करना है। दोहा में बातचीत के बाद जनरल मिले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी से परामर्श करने के लिए काबुल रवाना हो गए। मिले ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों को तेजी से हिंसा कम करने की जरूरत है।

तालिबान के खिलाफ प्रतिबंधों में किसी भी तरह की ढील शांति प्रक्रिया में बाधक बन सकती है : अफगानिस्तान

अफगानिस्तान ने कहा है कि तालिबान की हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और उसने वैश्विक आतंकवादी संगठनों से अपना रिश्ता भी बरकरार रखा है। इसलिए शांति की दिशा में तालिबान की प्रतिबद्धताओं में बिना कोई वास्तविक प्रगति देखे उस पर लगी पाबंदियों में किसी भी तरह की ढील देना शांति वार्ताओं पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।

संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि आदेला राज ने कहा कि तालिबान की गतिविधियों का पता लगाने विशेषकर शांति के लिए उसकी प्रतिबद्धताओं तथा अलकायदा एवं सभी आतंकवादी संगठनों से संबंध खत्म करने के उसके संकल्प पर नजर रखने के लिए बनी 1988 अफगानिस्तान प्रतिबंध समिति की सहायता कर रहे निगरानी दल का काम उल्लेखनीय है। राज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बृहस्पतिवार को ‘अफगानिस्तान में हालात’ विषय पर बोल रही थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि ये प्रतिबद्धताएं तालिबान के कार्यों में भी झलकनी चाहिए। यह भी दिखना चाहिए कि तालिबान किसी तरह की आतंकवादी गतिविधि में शामिल नहीं है और वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन के साथ न तो काम कर रहा है और न ही उसका सहयोग कर रहा है।’’ राज ने कहा, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि ऐसा नहीं हो रहा है। अफगान सुरक्षा बलों एवं खुफिया एजेंसियों तथा निगरानी दल को तालिबान के बारे में ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है।

तालिबान द्वारा हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं

उन्होंने कहा कि तालिबान द्वारा हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं और उसने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के साथ अपना रिश्ता भी बरकरार रखा है। ऐसी स्थिति में तालिबान की प्रतिबद्धताओं में बिना कोई वास्तविक प्रगति देखे उसके खिलाफ पाबंदियों में किसी भी तरह की ढील ठीक नहीं होगी।

सुरक्षा परिषद ने 1988 अफगानिस्तान प्रतिबंध समिति की सहायता कर रहे निगरानी दल का शासनादेश एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। पिछले सप्ताह ‘अफगानिस्तान में हालात’ प्रस्ताव को 193 सदस्यीय महासभा में स्वीकृत कर लिया गया। प्रस्ताव के पक्ष में 130 वोट पड़े जबिक रूस ने इसके खिलाफ वोट किया। वहीं, चीन, बेलारूस और पाकिस्तान अनुपस्थित थे। प्रस्ताव के अनुसार महासभा ने अफगानिस्तान को आत्मनिर्भर बनने, वहां स्थिरता एवं शांति बहाली के प्रयासों में अपना समर्थन जारी रखने का संकल्प जताया है।

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