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अफगानिस्तान में इस साल अब तक 3,60,000 लोग विस्थापन के लिए मजबूर हुए : संरा

By भाषा | Updated: August 5, 2021 11:31 IST

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(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, पांच अगस्त संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि अफगानिस्तान में बढ़ते संघर्ष के कारण इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक करीब 3,60,000 लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने लश्करगाह में लोगों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जतायी जहां तालिबान के साथ लड़ाई के कारण हजारों लोग फंसे हो सकते हैं।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सहायता अभियान (यूएनएएमए) ने शहरी इलाकों में लड़ाई को तत्काल बंद करने का आह्वान करते हुए कहा कि आम नागरिक हिंसा का दंश झेल रहे हैं।

हाल की एक खबर के अनुसार, लश्करगाह में पिछले 24 घंटों में 40 आम नागरिक मारे गए और 118 घायल हो गए। कंधार में कम से कम पांच आम नागरिकों की मौत हो गयी और 42 जख्मी हो गए।

महासचिव गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बुधवार को एक दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम लश्करगाह में लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं जहां लड़ाई के कारण हजारों लोग फंसे हो सकते हैं।’’

दुजारिक ने कहा कि इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक अफगानिस्तान में संघर्ष में करीब 3,60,000 लोग जबरन विस्थापित हुए हैं। करीब 50 लाख लोग 2012 से अब तक विस्थापित हो चुके हैं। साल के पहले छह महीनों में स्वास्थ्य केंद्रों पर हमलों ने अफगानिस्तान में 2,00,000 लोगों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा से वंचित कर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी संघर्षरत पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का अनुपालन करते हुए नागरिकों, सहायता कर्मियों और स्कूल तथा अस्पताल समेत असैन्य बुनियादी ढांचे की रक्षा करने का अनुरोध करते हैं।’’

उन्होंने बताया कि एक अगस्त को कंधार में 2,000 से अधिक लोगों को भोजन, पानी, सफाई व्यवस्था और नकद सहायता मुहैया करायी गयी।

अफगानिस्तान में ‘‘भयानक हिंसा’’ का सामना कर रहे बच्चों का जिक्र करते हुए दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र बाल निधि (यूनिसेफ) ने उस रिपोर्ट पर आक्रोश जताया है जिसमें फरयाद प्रांत में 12 वर्षीय लड़के से सरकारी विरोधी एक समूह के एक सदस्य ने क्रूरता से मारपीट की। यूनिसेफ ने कहा कि इस हिंसा से लड़का सदमे में है और स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर उसे, उसके परिवार को सहायता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों, असैन्य बुनियादी ढांचे के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा अस्वीकार्य है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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