खरगोन के विजय की आखिरी सांस बनी कई जिंदगियों की उम्मीद: रात के दो ग्रीन कॉरिडोर से इंदौर-अहमदाबाद पहुंचे अंग

By मुकेश मिश्रा | Updated: February 19, 2026 13:42 IST2026-02-19T13:41:03+5:302026-02-19T13:42:42+5:30

विजय का हृदय अहमदाबाद के मेरेडो सीआईएमएस अस्पताल पहुंचा। मात्र 15 मिनट बाद, रात 10:45 बजे दूसरा कॉरिडोर ज्यूपिटर से टी. चोइथराम अस्पताल तक तैयार हुआ।

Khargone Vijay last breath became hope many lives Organs reached Indore-Ahmedabad through 2 green corridors at night | खरगोन के विजय की आखिरी सांस बनी कई जिंदगियों की उम्मीद: रात के दो ग्रीन कॉरिडोर से इंदौर-अहमदाबाद पहुंचे अंग

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Highlights15 फरवरी को खरगोन के पास हुए भयानक रोड एक्सीडेंट में विजय गंभीर रूप से घायल हो गए।संस्था के काउंसलरों ने आराधना और परिजनों से घंटों भावुक बातचीत की।रात 10:30 बजे पहला ग्रीन कॉरिडोर ज्यूपिटर से देवी अहिल्या एयरपोर्ट तक बना।

इंदौर: सड़क हादसे ने खरगोन के विजय जायसवाल को हमेशा के लिए छीन लिया, लेकिन उनकी पत्नी आराधना और परिवार ने दर्द की उस घड़ी में मानवता का अनमोल उदाहरण कायम किया। मृत्यु के बाद उन्होंने विजय के अंग दान करने का साहसी फैसला लिया, जो न सिर्फ कई मरीजों की जिंदगी बचाएगा, बल्कि अंगदान के प्रति समाज को नई प्रेरणा देगा। इंदौर के चिकित्सकों और मुस्कान संस्था की मेहनत से रात के अंधेरे में दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ये कीमती अंग जरूरतमंदों तक पहुंचे। 15 फरवरी को खरगोन के पास हुए भयानक रोड एक्सीडेंट में विजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

ज्यूपिटर विशेष अस्पताल लाए गए विजय का इलाज डॉ. अंशुल जैन और सीनियर इंटेंसिविस्ट डॉ. वरुण देशमुख की टीम ने किया, लेकिन ब्रेनडेथ की दर्दनाक स्थिति बन गई। डॉक्टरों ने तुरंत मुस्कान संस्था को सूचना दी। संस्था के काउंसलरों ने आराधना और परिजनों से घंटों भावुक बातचीत की।

आंसुओं के बीच आराधना ने कहा, "विजय अब हमारे साथ नहीं, लेकिन उनकी सांसें किसी और को नई जिंदगी देंगी।" उन्होंने हृदय, लिवर, दोनों किडनी, पैंक्रियास, फेफड़े, आंतें और हार्ट वॉल्व दान करने की सहमति दी।परिवार के इस नेक फैसले ने रात को शहर को एकजुट कर दिया। रात 10:30 बजे पहला ग्रीन कॉरिडोर ज्यूपिटर से देवी अहिल्या एयरपोर्ट तक बना।

जहां से विजय का हृदय अहमदाबाद के मेरेडो सीआईएमएस अस्पताल पहुंचा। मात्र 15 मिनट बाद, रात 10:45 बजे दूसरा कॉरिडोर ज्यूपिटर से टी. चोइथराम अस्पताल तक तैयार हुआ। इन कॉरिडोरों ने समय की कीमत समझाई—हर सेकंड किसी की जिंदगी का सवाल था।आज विजय का लिवर और एक किडनी ज्यूपिटर के गंभीर मरीज को नई जिंदगी देगी।

जबकि दूसरी किडनी टी. चोइथराम के मरीज को ट्रांसप्लांट होगी। मुस्कान संस्था के सदस्यों ने बताया कि आराधना का यह कदम अंगदान को जन-आंदोलन बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से इंदौर अंगदान का केंद्र बन रहा है। विजय की कहानी हर परिवार को सोचने पर मजबूर करेगी, मृत्यु के बाद भी जीवन दान करना ही सच्ची अमरता है।

Web Title: Khargone Vijay last breath became hope many lives Organs reached Indore-Ahmedabad through 2 green corridors at night

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