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Vishwkarma Pooja 2020: जानें क्या है विश्वकर्मा पूजा का महत्व, व्रत कथा और पूजन विधि

By गुणातीत ओझा | Updated: September 17, 2020 11:58 IST

विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर के दिन मनाई जाती है। कई लोग विश्वकर्मा पूजा साल में दो बार भी करते हैं। ज्यादातर लोग 17 सितंबर के दिन विश्वकर्मा पूजा करते हैं, लेकिन वहीं राजस्थान और गुजरात के कुछ इलाकों में भगवान विश्वकर्मा का जन्म 7 फरवरी को भी मनाया जाता है।

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ठळक मुद्देविश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर के दिन की जाती है।कई लोग विश्वकर्मा पूजा साल में दो बार भी करते हैं।राजस्थान और गुजरात के कुछ इलाकों में भगवान विश्वकर्मा का जन्म 7 फरवरी को भी मनाया जाता है।

विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर के दिन की जाती है। कई लोग विश्वकर्मा पूजा साल में दो बार भी करते हैं। ज्यादातर लोग 17 सितंबर के दिन विश्वकर्मा पूजा करते हैं, लेकिन वहीं राजस्थान और गुजरात के कुछ इलाकों में भगवान विश्वकर्मा का जन्म 7 फरवरी को भी मनाया जाता है। भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है। यह दिन हिन्दुओं के लिए बेहद खास माना गया है। इस दिन के बारे में लोगों के बीच में ऐसी मान्‍यता है कि, इस दिन भगवान विश्‍वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के सातवें धर्मपुत्र के रूप में जन्‍म लिया था। विश्वकर्मा पूजा घर के साथ-साथ ही दुकानों, फैक्ट्री, दफ्तरों और कार्यालयों में भी की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान विश्वकर्मा, के साथ ही उनके वाहन हाथी की भी पूजा किए जाने का विधान बताया गया है।

विश्वकर्मा पूजा तिथि और शुभ मुहूर्त 

-विश्वकर्मा पूजा- 17 सितम्बर 2020- दिन गुरुवार-विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त – 07 बज-कर 23 मिनट (शाम)

विश्वकर्मा जी के बारे में माना जाता है कि एक महान ऋषि होने के साथ-साथ वो एक बेहद ही शानदार शिल्पकार और ब्रह्मा ज्ञानी भी थे। ऋग्वेद में उनके बारे में कई जगह उल्लेख किया गया है। ऐसी मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के घर, नगर, अस्त्र-शस्त्र आदि चीजों का निर्माण किया था। इसके अलावा हस्तिनापुर, द्वारिकापुरी, पुष्पक विमान, भगवान शिव का त्रिशूल इत्यादि चीजों के निर्माता भी विश्वकर्मा जी को ही माना जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी विश्वकर्मा जी ने ही निर्मित किया था। 

पूजन विधि 

-इस दिन सूर्य निकलने से पहले स्नान आदि करके पवित्र हो जाना चाहिए। -इसके बाद रोजाना उपयोग में आने वाली मशीनों को साफ किया जाता है। फिर पूजा करने बैठे। -इस दिन पूजा में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान विश्वकर्मा की भी तस्वीर शामिल करें। -इसके बाद दोनों ही देवताओं को कुमकुम, अक्षत, अबीर, गुलाल, हल्दी, व फूल, फल, मेवे, मिठाई इत्यादि अर्पित करें। -आटे की रंगोली बनाएं और उनके ऊपर सात तरह के अनाज रखें। -पूजा में जल का एक कलश भी शामिल करें। -धूप दीप इत्यादि दिखाकर दोनों भगवानों की आरती करें।

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