माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी मनाई जाती है। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्यनारायण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान सूर्य की पूजा अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति और संतान प्राप्ति के लिए की जाती है। ये तिथि हर साल बसंत पंचमी के दूसरे या तीसरे दिन मनाई जाती है। इसे भगवान सूर्यदेव के जन्मदिन के तौर पर भी मनाया जाता है।
संतान प्राप्ति के लिए होती है ये पूजा
ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूवर्क पूजा और व्रत रखा जाए तो आरोग्य और संतान की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि इसे आरोग्य सप्तमी या पुत्र सप्तमी भी कहा जाता है। इसी दिन से सूर्य के सातों घोड़े उनके रथ को वहन करना प्रारंभ करते हैं, इसलिए इसको रथ सप्तमी भी कहते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को संतान प्राप्ति में बाधा हो उनके लिए उनके लिए भी ये व्रत काफी फलदायी है।
शुभ मुहूर्त
रथ सप्तमी शुरू: 1 जनवरी 2020, शनिवार 15:50 बजे से
रथ सप्तमी खत्म: 01 फरवरी 2020, रविवार 18:08 बजे तक
रथ सप्तमी पर कैसे करें सूर्य नारायण की पूजा?
- रथ सप्तमी के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठे स्नान के जल में गंगाजल डालकर स्नान करें।
- सूर्य नारायण को तांबे के लोटे से जल में कुमकुम शक्कर लाल फूल डालकर अर्घ्य दें।
- अर्घ्य दिए जल को अपने माथे पर छिड़कें।
- भगवान सूर्य के बारह नामों का जाप तीन बार करें और अपने पिता के चरण स्पर्श जरूर करें।