Chaitra Navratri 2026: विंध्याचल जाने का बना रहे हैं प्लान? तो पहले जान लें चौकिया धाम की यह परंपरा, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

By अंजली चौहान | Updated: March 19, 2026 11:27 IST2026-03-19T11:27:49+5:302026-03-19T11:27:54+5:30

Chaitra Navratri 2026: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित मां शीतला चौकियां धाम एक प्राचीन और अत्यंत पूजनीय शक्तिपीठ है।

Sheetla Mata Chaukiya Dham Why is it important to visit here before going to Vindhyachal in Chaitra Navratri 2026 know | Chaitra Navratri 2026: विंध्याचल जाने का बना रहे हैं प्लान? तो पहले जान लें चौकिया धाम की यह परंपरा, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

Chaitra Navratri 2026: विंध्याचल जाने का बना रहे हैं प्लान? तो पहले जान लें चौकिया धाम की यह परंपरा, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा को समर्पित है जो 19 मार्च से अगले नौ दिनों तक चलेगा। इस दौरान परंपरा अनुसार, हर रोजा माता के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी दुर्गा को खुश करने और अपने कष्टों को दूर करने के लिए भक्त मंदिरों में दर्शन, व्रत-उपवास करते हैं। श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापित कर नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। 

हालांकि, देवी मां की घर में पूजा के साथ मंदिरों में दर्शन करना बहुत शुभ होता है। ऐसे में इस दौरान आपको माता के मंदिर जरूर जाना चाहिए। वैसे तो पूरे भारत में माता रानी के कई मंदिर है जिनका इतिहास वर्षों पुराना है और सालों से इनकी महिमा भक्त देख रहे हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद ही लोग जानते हो? यह मंदिर दिल्ली से बस कुछ ही घंटों की दूरी पर स्थित है। जहां जाना बेहद आसान है न कोई पहाड़ी चढ़ाई और न किसी नदी को पार करने की दिक्कत..., बस मन में आस्था ही काफी है और आप इस मंदिर आसानी से पहुंच सकते हैं। 

यह प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश में स्थित है। जहां विंध्याचल धाम जाने से पहले जाना बहुत जरूरी है और इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है।

शीतला माता चौकिया धाम के बारे में 

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित शीतला माता चौकिया धाम एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, विन्ध्याचल (मां विन्ध्यवासिनी) के दर्शन से पहले चौकिया धाम जाने की परंपरा का विशेष महत्व है। कई श्रद्धालु अपनी यात्रा की शुरुआत यहीं से करते हैं।

इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण शिव और शक्ति के उपासक अहीर या भर शासकों द्वारा कराया गया था। मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल जितना पुराना है और पांडवों ने भी अपने अज्ञातवास के दौरान यहाँ पूजा की थी।

'चौकिया' शब्द एक ऊंचे चबूतरे (चौकी) से आया है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में देवी की प्रतिमा एक ऊंचे चबूतरे पर स्थापित थी, जिसके कारण इन्हें 'चौकिया माता' कहा जाने लगा।

मंदिर के दर्शन का समय

खुलने का समय: सुबह 5:00 या 6:00 बजे से रात 9:00 - 10:00 बजे तक (त्योहारों पर समय बढ़ाया जा सकता है)।

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