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Shattila Ekadashi 2022: षटतिला एकादशी व्रत कल, जरूर करें ये 5 उपाय, मनोकामना होगी पूरी

By रुस्तम राणा | Updated: January 27, 2022 14:21 IST

षटतिला एकादशी व्रत भगवान विष्णु जी को समर्पित माना जाता है। इस दिन उनके लिए ही उपवास किया जाता है। यह व्रत 28 जनवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा।

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षटतिला एकादशी व्रत 28 जनवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। हिन्दू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है। षटतिला एकादशी पर विशेष रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन तिल का प्रयोग करना बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से सालों की तपस्या और स्वर्ण दान के समान पुण्य प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि षटतिला एकादशी के दिन कुछ विशेष उपाय करने से जातकों को शुभ परिणामों की प्राप्ति होती है। आप भी ये पांच उपाय कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। षटतिला एकादशी के उपाय इस प्रकार हैं- 

1. जो लोग आज के दिन उपवास रखते हैं और सच्चे मन से विष्णु जी की पूजा करते हैं। उन्हें स्वस्थ, समृद्ध और संपन्न जीवन प्राप्त होता है। साथ ही, हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने वाले भक्त जन्म चक्र से मुक्त से निकलकर  मोक्ष प्राप्त करते हैं।

2. प्रत्येक एकादशी की पूजा भगवान विष्णु या उनके अवतार से जुड़ी होती है और भगवान विष्णु को पीला रंग बेहद पसंद है, इसलिए इसदिन उनकी कृपा पाने के लिए उन्हें पीले रंग के वस्त्र और मिठाई अर्पित करना चाहिए। इससे आपको जगत के पालनहार का आशीर्वाद प्राप्त होगा। 

3. षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के किसी भी मंत्र का जाप करें और उन्हें तुलसी की माला अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने से वे प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। भगवान विष्णु को कमल का फूल प्रिय है, इसदिन मंदिर जा कर भगवान कृष्ण या भगवान राम की मूर्ति पर कमल का फूल चढ़ाएं।

4. मन की किसी इच्छा को पूरा करना चाहते हैं तो किसी भी कादशी पर भगवान विष्णु को इत्र चढ़ाएं। ऐसा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पीपल में भगवान विष्णु जी का वास माना जाता है। इस दिन पीपल का पौधा लगाने और उसमें नियमित रूप से जल चढ़ाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

5. षटतिला एकादशी पर तिल का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है। पुराणिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति तिल का दान करता है उसे मृत्यु के बाद नरक नहीं जाना पड़ता है। उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

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