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Sawan Shivratri 2020: आज है सावन शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय और पूजा विधि

By गुणातीत ओझा | Updated: July 19, 2020 23:02 IST

Sawan Shivratri 2020: आज रविवार (19 July) को सावन शिवरात्रि है। सावन में शिवरात्रि के व्रत का विशेष महत्व होता है। सावन की शिवरात्रि के दिन व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान शिव की भक्तों पर विशेष कृपा बनती है। आइए आपको बताते हैं सावन शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त व शिवलिंग पर जल अभिषेक करने का शुभ समय...

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ठळक मुद्देसावन में भगवान शिव भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। चतुर्दशी तिथि महादेव की तिथि है और उनको समर्पित है।सावन शिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत- 19 जुलाई 2020, दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से हो जाएगी।

सावन शिवरात्रि 2020: सावन महीना शिव को समर्पित होता है, शिव की सेवा का महीना होता है, शिव की आराधना का महीना और शिव से सुख-समृद्धि, कष्टों के निवारण और मोक्ष का आशीर्वाद पाने का महीना होता है। सावन में भगवान शिव भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। चतुर्दशी तिथि महादेव की तिथि है और उनको समर्पित है। इसलिए इस दिन भोलेनाथ की आराधना करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार सावन की शिवरात्रि आज 19 जुलाई, रविवार को है। सावन की शिवरात्रि का खास महत्व होता है। इस दिन भगवान भोलेशंकर की भक्तिभाव से आराधना करने पर ऐश्वर्य का भोग करने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन शिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से पूरे साल की पूजा का फल प्राप्त होता है।

सावन शिवरात्रि शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त

सावन शिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत- 19 जुलाई 2020, दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से हो जाएगी।

चतुर्दशी तिथि का समापन- 20 जुलाई 2020, दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर होगा।

हर मुहूर्त है शुभ

सावन शिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा हर पहर में की जा सकती है। शिव की पूजा के लिए सारे मुहूर्त शुभ माने गए हैं। क्योंकि यह पूरा माह भगवान शिव को ही समर्पित है।

सावन शिवरात्रि पूजा विधि

शिवपुराण में शिवरात्रि का बहुत महत्व है। सावन में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। सावन शिवरात्रि के दिन शिवभक्त को सूर्योदय के पूर्व उठना चाहिए। स्नान आदि से निवृत्त होकर एक तांबे के लोटे में गंगाजल लेकर शिव मंदिर जाएं। एक अन्य लोटे में दूध भी ले सकते हैं। गंगाजल न हो तो शुद्ध और ताजा जल लेकर उसमें किसी पवित्र नदी का थोड़ा सा जल मिला सकते हैं। या शिवलिंग पर ताजा, शुद्ध जल भी समर्पित कर सकते हैं। अब शिवमंत्रों का जाप करते हुए शिवलिंग पर पतली धारा से जल चढ़ाएं। महादेव को अक्षत, सुगंधित फूल, श्वेत पुष्प, आंकड़ा, धतूरा, आदि समर्पित करें। बिल्वपत्र अपनी श्रद्धानुसार शिवलिंग पर समर्पित करें। महादेव को भांग, ऋतुफल, मिठाई, पंचामृत, पंचमेवा आदि का भोग लगाएं। शिव पंचाक्षरी मंत्र, रुद्राष्टक, शिव महिम्नस्त्रोत, तांडवस्त्रोत, शिव चालीसा इनमें किसी एक का या संभव हो तो सभी का पाठ करें। आखिर में महादेव की आरती उतारें और उनसे मनोकामना पूर्ति और मोक्ष की प्रार्थना करें। ऐसा करने से गृहदोष की पीड़ा का भी नाश होता है।

इन मन्त्रों का करें जाप

सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के महामंत्र- ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए।

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