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रमा एकदशी पर बन रहा है शुभ योग, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: October 20, 2022 14:24 IST

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने वालों को भगवान विष्णु जी के साथ-साथ मां लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Rama Ekadashi 2022 Date:  इस साल रमा एकादशी व्रत 21 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने वालों को भगवान विष्णु जी के साथ-साथ मां लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी जी का एक नाम रमा भी है। इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है। ऐसा करने से जातकों की समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। आइए जानते हैं रमा एकादशी का शुभ मुहूर्त पूजाविधि और महत्‍व।

रमा एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ - 20 अक्टूबर 2022 को शाम 4.04 बजे से एकादशी तिथि समाप्त - 21 अक्टूबर 2022 को शाम 5.22 बजे तकव्रत पारण - 22 अक्टूबर 2022 को सुबह 6.30 से 08.47 बजे तक

रमा एकादशी के दिन बन रहा है शुभ योग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल रमा एकादशी के दिन शुभ योग बन रहा है। जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन सुबह से शुक्ल योग रहेगा और शाम 05 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा। जबकि इसके बाद ब्रह्म योग प्रारंभ हो जाएगा। कहते हैं इन योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है।

रमा एकादशी व्रत विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।व्रत का संकल्प लें।घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।विष्णु जी का गंगा जल से अभिषेक करें।उन्हें पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।भगवान को भोग लगाएं।भगवान की आरती करें। रात्रि जागरण करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।अगले दिन व्रत पारण मुहूर्त में व्रत खोलें। 

रमा एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो लोग रमा एकादशी का व्रत रखते हैं और सच्चे मन से विष्णु जी की पूजा करते हैं। उन्हें स्वस्थ, समृद्ध और संपन्न जीवन प्राप्त होता है। साथ ही, हिन्दू मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने वाले भक्त जन्म चक्र से मुक्त से निकलकर  मोक्ष प्राप्त करते हैं। इस दिन विधि पूर्वक भगवान शालिग्राम की आराधना करने से जीवन में धन-धान्य के भंडार भरते हैं।

टॅग्स :एकादशीभगवान विष्णुमां लक्ष्मी
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