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मोहिनी एकादशी 15 मई को, इस सरल विधि से करें व्रत-पूजन, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

By गुलनीत कौर | Updated: May 14, 2019 10:22 IST

पंचांग के अनुसार 14 मई यानी मंगलवार की दोपहर 12 बजकर 59 मिनट पर ही वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो कि अगले दिन 15 मई, दिन बुधवार की सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक चलेगी। चूंकि तिथि के प्रारंभ होने के बाद सूर्य उदय 15 मई से हो रहा है इसलिए एकादशी का व्रत एवं पूजन 15 मई को ही किया जाना उचित माना गया है।

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हिन्दू धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को 'मोहिनी एकादशी'के नाम से जाना जाता है। यह भगवान विष्णु के स्त्री रूप को समर्पित दिन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसदिन भगवान विष्णु स्त्री रूप में प्रकट हुए थे। पुराणों में विष्णु के स्त्री रूप को मोहिनी का नाम दिया गया, इसलिए हर साल यह पर्व 'मोहिनी एकादशी' के नाम से मनाया जाता है। इस साल मोहिनी एकादशी 15 मई 2019, दिन बुधवार को मनाई जा रही है। 

हिन्दू हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रति माह दो एकादशी तिथि आती है। एक शुक्ल पक्ष की एकादशी और दूसरी कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि होती है। दोनों तिथियों पर भगवान विष्णु एवं उनके रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। मोहिनी एकादशी का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत एवं पूजन करने से व्यक्ति संसार के मोह से दूर होता है और सफलता को प्राप्त करता है।

मोहिनी एकादशी 2019 तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त (Mohini Ekadashi date, time, puja shubh muhurat)

पंचांग के अनुसार 14 मई यानी मंगलवार की दोपहर 12 बजकर 59 मिनट पर ही वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो कि अगले दिन 15 मई, दिन बुधवार की सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक चलेगी। चूंकि तिथि के प्रारंभ होने के बाद सूर्य उदय 15 मई से हो रहा है इसलिए एकादशी का व्रत एवं पूजन 15 मई को ही किया जाना उचित माना गया है। 15 मई की सुबह जल्दी उठकर, स्नान, पूजा करके व्रत का संकल्प लिया जाता सकता है।

यह भी पढ़ें: मोहिनी एकादशी: भगवान विष्णु को खुश करने के 5 महाउपाय

मोहिनी एकादशी व्रत विधि (Mohini Ekadashi vrat vidhi)

भगवान विष्णु के स्त्री रूप को समर्पित मोहिनी एकादशी के व्रत की विधि बेहद आसान है। सुबह उठकर स्नानादि करने के बाद पूजा-पाठ करें और इस दौरान व्रत का संकल्प लें। व्रत के लिए फलाहार निश्चित करें और दिनभर इसी का सेवन करते व्रत का पालन करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को व्रत का पारण होता है। पूजा, व्रत के अलावा गरीबों में पीली वस्तुएं दान करने का भी महत्व है।

क्यों लिया था विष्णु ने स्त्री अवतार? (Mohini Ekadashi Vrat Katha)

एक पौराणिक कथा के अनुसार यह समुद्र मंथन का समय था। शीरासागर से पवित्र अमृत की प्राप्ति के लिए एक तरफ सभी देवता गण और दूसरी ओर दैत्यों की सेना समुद्र का मंथन कर रही थी। तभी अचानक से क्षीरसागर से पवित्र अमृत कलश प्रकट हुआ। उसे पाने के लिए देवताओं और दैत्यों में युद्ध हुआ। जिस बीच गलती से पवित्र अमृत कलश दैत्यों के हाथ लग गया।

यह देख देवता गण चिंतित हो उठे। उन्होंने तुरंत भगवान विष्णु से मदद माँगी। दैत्यों ने यदि पवित्र अमृत ग्रहण कर लिया तो वे बलवान हो जाएंगे और देवताओं का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। तब भगवान विष्णु ने एक बेहद सुन्दर और आकर्षक स्त्री का अवतार लिया। उसे देखते ही सभी दैत्य स्त्री की ओर आकर्षित हो गए। इस बात का लाभ उठाकर मोहिनी ने दैत्यों के हाथ से पवित्र अमृत कलश लिया और देवताओं को दे दिया।

जिस दिन भगवान विष्णु ने सुन्दर स्त्री यानी मोहिनी का रूप धारण किया था, वह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का दिन था। इसलिए शास्त्रों में इस तिथि को भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के प्रकट होने की खुशी में पर्व के रूप में मनाया जाता है। मोहिनी अवतार ने बुराई पर अच्छाई की जीत पाई और सभी को मोह त्याग कर सफलता के मार्ग पर चलने का आदेश दिया। इसे आधार मानते हुए इस एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है।

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