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विशेषज्ञ से जानें कैसे करें मंत्रों का सही उच्चारण, ताकि मिले मनचाहा फल

By गुलनीत कौर | Updated: January 5, 2018 11:26 IST

शास्त्रों में मंत्र जाप के लिए विशेष मालाओं का उल्लेख मिलता है जो साधना को फलदायी बनाती हैं।

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मनोकामना पूर्ती हेतु या धार्मिक उद्देश्य से ही लोग मंत्र जाप तो करते हैं लेकिन अमूमन इसके पीछे छुपे महत्त्व और नियमों को अनदेखा कर देते हैं। जिस प्रकार से पूजा करते समय नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है, ठीक उसी तरह से शास्त्रों के अनुसार हमें मंत्र जाप के दौरान भी कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए। 

पं. अवधेश शास्त्री जी के अनुसार कुछ मूल बातें हैं जिन्हें मंत्र जाप करने से पहले और मंत्र जाप के दौरान साधक को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। ये नियम कढ़े नहीं हैं किन्तु हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचने  का मार्गदर्शन करते हैं और सफलता दिलाते हैं। 

शास्त्री जी के अनुसार मंत्र जाप से पूर्व साधक को संकल्प लेना चाहिए, संकल्प जाप माला की संख्या का। इसके बाद मंत्रों की संख्या की गणना हेतु किस माला का प्रयोग किया जाना चाहिए, यह बेहद महत्त्वपूर्ण है।

जाप माला गणना के लिए शास्त्रों में  मुख्यतः तीन मालाओं का उल्लेख मिलता है: वर्णमाला, करमाला एवं मणिमाला। साधारणयतः साधक को करमाला एवं मणिमाला का उपयोग ही करना चाहिए। 

क्या है करमाला?

करमाला से तात्पर्य है हाथ की उंगलियों पर ही मंत्रों की गिनती करते हुए जाप करना। इस जाप को करते समय साधक अधिक जागरूक होता है। किन्तु जरा-सी लापरवाही जाप को खण्डित कर सकती है। करमाला के उपयोग से साधक किसी भी देवी-देवता के मंत्र का जाप कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास कर सकता है। यह विधि दैनिक मंत्र जाप के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। 

करमाला विधि में उंगलियों को थोड़ा मोड़कर अंगूठे से उंगलियों के पर्वों पर मंत्र जाप की गिनती की जाती है। शास्त्री जी के कहे अनुसार इस जाप विधि को करते समय साधक को उंगलियां अलग-अलग नहीं रखनी चाहिए। ऐसा कर वह विधि और जाप साधना का उल्लंघन करता है। 

मणिमाला क्या है? 

विशेष प्रकार की मणियों से बनी माला को ही मणिमाला का नाम दिया जाता है। इस प्रकार की माला में कैसी भी मणियां हो सकती हैं। शास्त्रों में रुद्राक्ष की माला को सबसे महत्त्वपूर्ण एवं पवित्र मणिमाला का दर्जा प्राप्त है। इस माला के उपयोग से साधक ना केवल सफल जाप साधना कर सकता है अपितु इसे गले या कलाई में धारण कर वह चित एवं मन की शांती को भी पा सकता है।

मणिमाला में सामान्यतः 108 मणके होते हैं। 54 एवं 27 मणकों की माला भी मिलती है किन्तु माला पर जाप की संख्या 108 होने पर ही पूर्ण मानी जाती है। शास्त्री जी के अनुसार साधक को मणिमाला पर एक माला की जाप संख्या पूर्ण करने के बाद माला को अपनी आंखों एवं ललाट पर लगाना चाहिए। इसके बाद वह चाहे तो अगली संख्या आरंभ कर सकता है। 

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