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Lunar Eclipse 2019: कल आधी रात से भारत में दिखेगा अद्भुत चंद्रग्रहण, जानिए ग्रहण का समय और क्यों है ये खास

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 15, 2019 08:56 IST

चंद्रग्रहण केवल धर्म के लिहाज से ही नहीं बल्कि विज्ञान के नजरिये से भी एक अहम मौका होता है। इस दौरान खगोलशास्त्री अंतरिक्ष से जुड़े शोध में जुटे होते हैं।

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ठळक मुद्देभारत में आधी रात के बाद लगेगा चंद्रग्रहण, रात 1.31 बजे से होगा शुरू17 जुलाई को तड़के 4.30 बजे खत्म होगा चंद्रग्रहण, भारत सहित कई देशों में दिखेगा ये ग्रहण

इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण 16 और 17 जुलाई की आधी रात को लग रहा है। यह इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण है। इस आंशिक चंद्रग्रहण को अरुणाचल प्रदेश के कुछ दुर्गम उत्तरी पूर्वी हिस्सों को छोड़ पूरे भारत में देखा जा सकेगा। इससे पहले साल का पहला चंद्रग्रहण 20 और 21 जनवरी की रात को लगा था। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक यह चंद्रग्रहण कई मायनों में बेहद खास है। दरअसल, यह ग्रहण 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन लग रहा है और साथ ही ग्रहण के अगले ही दिन यानी 17 जुलाई से सावन का महीना भी शुरू हो रहा है।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय राहु और शनि चंद्रमा के साथ धनु राशि में होंगे। इससे ग्रहण का प्रभाव और बढ़ेगा। साथ ही सूर्य और चंद्र चार विपरीत के ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। इससे पहले 1870 में गुरु पूर्णिमा के दिन लगे चंद्र ग्रहण में ऐसे योग बने थे।

Lunar Eclipse 2019: चद्रग्रहण का समय क्या है

चंद्रग्रहण 16 और 17 जुलाई की मध्य रात्रि में शुरू होगा। भारत में चंद्रग्रहण 16 जुलाई की रात 1.31 बजे से शुरू होगा और ग्रहण का मध्य तीन बजे से होगा। साथ ही ग्रहण का मोक्ष 4.30 बजे होगा। इस खंड ग्रास चंद्र ग्रहण की पूर्ण अवधि दो घंटे और 59 मिनट की होगी। भारत में चंद्रमा 17 जुलाई की सुबह 5.25 बजे अस्त होगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण में 9 घंटे पहले से सूतक लग जाता है। इस लिहाज से चंद्र ग्रहण का सूतक 16 जुलाई को दिन में 4.30 बजे से शुरू हो जाएगा। 

Lunar Eclipse 2019: ये चंद्रग्रहण क्यों खास है?

चंद्रग्रहण केवल धर्म के लिहाज से ही नहीं बल्कि विज्ञान के नजरिये से भी एक अहम मौका होता है। इस दौरान खगोलशास्त्री अंतरिक्ष से जुड़े शोध में जुटे होते हैं। गौरतलब है कि इसी साल का चंद्रग्रहण जब और 20 और 21 जनवरी की रात लगा था तो उसे वैज्ञानिकों ने सुपर ब्लड वुल्फ मून (Super Blood Wolf Moon) नाम दिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे चंद्रग्रहण में चांद पूरा लाल नजर आता है। भारत में यह नजारा तब नहीं दिखा था। हालांकि, इस बार जो चंद्रग्रहण लगने जा रहा है उसे हाफ ब्लड थंडर मून इक्लिप्स नाम दिया गया। 

इस ग्रहण के समय चंद्रमा का आधा हिस्सा लाला और आधा ढका हुआ नजर आयेगा और ये नजारा अद्भुत होगा। इस चंद्रग्रहण को भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चीन, कोरिया, यूरोप के कुछ हिस्सों और रूस आदि जगहों में देखा जा सकेगा।

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