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Monday Fast (Vrat): 16 सोमवार के व्रत से मिलेगा मनचाहा फल, जानें विधि, इन नियमों का पालन जरूर करें

By गुणातीत ओझा | Updated: June 15, 2020 10:13 IST

भगवान शिव और देवी पर्वती को खुश करने के लिए 16 सोमवार का व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत सोमवार के दिन किया जाता है।

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ठळक मुद्देइस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस व्रत को शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है।व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। शास्त्रों में लिखा है कि जो स्त्री-पुरुष सोमवार का विधिवत व्रत करते और व्रतकथा सुनते हैं उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

16 Somwar Vrat: भगवान शिव और देवी पर्वती को खुश करने के लिए 16 सोमवार का व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत सोमवार के दिन किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती जी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस व्रत को शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है। व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। शास्त्रों में लिखा है कि जो स्त्री-पुरुष सोमवार का विधिवत व्रत करते और व्रतकथा सुनते हैं उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

कैसे करें सोमवार व्रत-पूजन

-सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें।-पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।-गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें।-घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।-पूरी पूजन तैयारी के बाद निम्न मंत्र से संकल्प लें -- 'मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमवार व्रतं करिष्ये'

इन मंत्रों के साथ ध्यान लगाएं

'ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्‌।पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्‌॥'

-ध्यान के पश्चात 'ॐ नमः शिवाय' से शिवजी का तथा 'ॐ नमः शिवाय' से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें।-पूजन के पश्चात व्रत कथा सुनें।-आरती कर प्रसाद वितरण करें।-इसके बाद भोजन या फलाहार ग्रहण करें।

सोमवार व्रत की आरती

आरती करत जनक कर जोरे।बड़े भाग्य रामजी घर आए मोरे॥

जीत स्वयंवर धनुष चढ़ाए।सब भूपन के गर्व मिटाए॥तोरि पिनाक किए दुइ खंडा।रघुकुल हर्ष रावण मन शंका॥

आई सिय लिए संग सहेली।हरषि निरख वरमाला मेली॥

गज मोतियन के चौक पुराए।कनक कलश भरि मंगल गाए॥

कंचन थार कपूर की बाती।सुर नर मुनि जन आए बराती॥फिरत भांवरी बाजा बाजे।

सिया सहित रघुबीर विराजे॥

धनि-धनि राम लखन दोउ भाई।धनि दशरथ कौशल्या माई॥

राजा दशरथ जनक विदेही।भरत शत्रुघन परम सनेही॥

मिथिलापुर में बजत बधाई।दास मुरारी स्वामी आरती गाई॥

व्रत का फल

-जीवन धन-धान्य से भर जाता है।-सभी अनिष्टों का हरण कर भगवान शिव अपने भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं।-सोमवार व्रत नियमित रूप से करने पर भगवान शिव तथा देवी पार्वती की अनुकंपा बनी रहती है।

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