Jagannath Rath Yatra 2022: जगन्नाथ रथ यात्रा 1 जुलाई से होगी शुरू, जानें क्या है इसका महत्व और क्यों निकाली जाती है यात्रा

By रुस्तम राणा | Published: June 27, 2022 03:14 PM2022-06-27T15:14:09+5:302022-06-27T15:15:26+5:30

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को प्रारंभ होती है और इस बार ये तिथि 1 जुलाई यानी कि शुक्रवार को है। इस कारण यात्रा 1 जुलाई को प्रारंभ होगी। 

Jagannath Rath Yatra 2022 date signifiacance and story of Jagannath Rath Yatra | Jagannath Rath Yatra 2022: जगन्नाथ रथ यात्रा 1 जुलाई से होगी शुरू, जानें क्या है इसका महत्व और क्यों निकाली जाती है यात्रा

Jagannath Rath Yatra 2022: जगन्नाथ रथ यात्रा 1 जुलाई से होगी शुरू, जानें क्या है इसका महत्व और क्यों निकाली जाती है यात्रा

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Jagannath Rath Yatra 2022: जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म का विश्व प्रसिद्ध त्योहार है जिसे काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। ओडिशा के पुरी में इसे बेहद भव्य तरीके से निकाला जाता है। इसलिए इसे पुरी रथ यात्रा और रथ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता हैं। जगन्नाथ रथ यात्रा में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। दरअसल, यह यात्रा भगवान जगन्नाथ को समर्पित मानी जाती है, जो भगवान विष्णु जी के अवतार हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति इस रथ यात्रा में भाग लेता है वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। 

कब निकाली जाएगी जगन्नाथ रथ यात्रा? 

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को प्रारंभ होती है और इस बार ये तिथि 1 जुलाई यानी कि शुक्रवार को है। इस कारण यात्रा 1 जुलाई को प्रारंभ होगी। जबकि शुक्ल पक्ष के 11 वें दिन यात्रा का समापन होता है।

क्यों निकाली जाती है यात्रा?

पौराणिक मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन जगत के नाथ श्री जगन्नाथ पुरी का जन्मदिन होता है। उस दिन प्रभु जगन्नाथ को बड़े भाई बलराम जी और बहन सुभद्रा के साथ रत्नसिंहासन से उतार कर मंदिर के पास बने स्नान मंडप में ले जाया जाता है। 108 कलशों से उनका शाही स्नान होता है। इस स्नान से प्रभु बीमार हो जाते हैं उन्हें ज्वर आ जाता है। तब 15 दिन तक प्रभु जी को एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जिसे ओसर घर कहते हैं। इस 15 दिनों की अवधि में महाप्रभु को मंदिर के प्रमुख सेवकों और वैद्यों के अलावा कोई और नहीं देख सकता। इस दौरान मंदिर में महाप्रभु के प्रतिनिधि अलारनाथ जी की प्रतिमा स्थपित की जाती हैं तथा उनकी पूजा अर्चना की जाती है। 15 दिन बाद भगवान स्वस्थ होकर कक्ष से बाहर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। जिसे नव यौवन नैत्र उत्सव भी कहते हैं। इसके बाद द्वितीया के दिन महाप्रभु श्री कृष्ण और बड़े भाई बलराम जी तथा बहन सुभद्रा जी के साथ बाहर राजमार्ग पर आते हैं और रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व

धार्मिक रूप से यात्रा का बड़ा महत्व है। पुरी हिंदू धर्म के चार सबसे पवित्र धामों में से एक है। यहां भगवान जगन्नाथ विराजमान हैं। मान्यता है कि जो कोई भक्त इस इनकी इस यात्रा में शामिल होता है भगवान जगन्नाथ उनके समस्त दुखों को हर लेते हैं। साथ ही उन्हें 100 यज्ञों के समान मिलने वाला पुण्य लाभ प्राप्त होता है। इतना ही नहीं, व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

Web Title: Jagannath Rath Yatra 2022 date signifiacance and story of Jagannath Rath Yatra

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