Holi Date 2026: चंद्र ग्रहण की वजह से बदली होली की तारीख; जानें सूतक काल का समय और होली की सही डेट

By अंजली चौहान | Updated: February 21, 2026 12:22 IST2026-02-21T12:21:08+5:302026-02-21T12:22:37+5:30

Holi Date 2026: होली 2026 में पूर्ण चंद्र ग्रहण, सूतक काल और भद्रकाल के कारण एक अनोखा मोड़ आएगा, जिससे होलिका दहन और धुलेंडी के बीच 24 घंटे का अंतराल होगा।

Holi Date 2026 date of Holi has changed due to lunar eclipse know about Sutak period and exact date of Holi | Holi Date 2026: चंद्र ग्रहण की वजह से बदली होली की तारीख; जानें सूतक काल का समय और होली की सही डेट

Holi Date 2026: चंद्र ग्रहण की वजह से बदली होली की तारीख; जानें सूतक काल का समय और होली की सही डेट

Holi Date 2026: पूरे देश में बच्चे-बूढ़े सभी होली का इंतजार कर रहे हैं, जब लोग अपनों के संग रंगों का त्योहार मनाएंगे। मगर इस बार लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं कि होली 3 मार्च को है या 4 मार्च को। पंचांग, ​​तारीखों और ग्रहों की स्थिति ने तारीख को लेकर काफी कंफ्यूजन पैदा कर दिया है। आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि इस साल होलिका दहन कब होगा और रंगों का त्योहार होली कब मनाया जाएगा?

3 मार्च या 4 मार्च, जानें होली कब है।

पंचांग कैलकुलेशन के अनुसार, इस साल अधिक मास के असर से कई त्योहारों की तारीखें बदल गई हैं। पिछले साल होली मार्च के बीच में मनाई गई थी, वहीं इस बार रंगों का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा। अलग-अलग पंचांगों में अलग-अलग तारीखों की वजह से कंफ्यूजन पैदा हुआ है, लेकिन क्लासिकल कैलकुलेशन के आधार पर रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

चंद्र ग्रहण के कारण होली की तारीख बदली

दरअसल, 3 मार्च की शाम को चंद्र ग्रहण लगने की उम्मीद है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, इस दौरान शुभ काम वर्जित होते हैं। इसलिए रंगों का त्योहार होली 3 मार्च को न मनाकर 4 मार्च को मनाना शास्त्रों के अनुसार सही माना गया है।

होलिका दहन कब है?

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा) 2 मार्च को शाम 5:32 बजे शुरू होगी और 3 मार्च को शाम 4:46 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा शुरू होते ही भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा के मुख्य चरण में होलिका दहन नहीं किया जाता है, बल्कि भद्रा के अंतिम चरण को शुभ माना जाता है। इसलिए, होलिका दहन का शुभ समय 2 मार्च को सुबह 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच रहेगा। 3 मार्च को सूर्योदय के समय पूर्णिमा होगी और इस दिन स्नान, दान, व्रत और कुलदेवता की पूजा करने की परंपरा निभाई जाएगी।

कब से शुरू है होलाष्टक

होलिका दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है। 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होगा और 3 मार्च तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी नए काम की शुरुआत जैसे शुभ काम नहीं किए जाते हैं।

होली 4 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों के मेल में मनाई जाएगी। पूर्वा फाल्गुनी सुबह तक रहेगी और उत्तरा फाल्गुनी पूरे दिन रहेगी। धृति योग भी रहेगा, जिसे शुभ और फलदायी माना जाता है।

होली क्यों मनाई जाती है?

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि आस्था और विश्वास का भी प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप ने उन्हें उनकी भक्ति से दूर करने की कोशिश की, लेकिन प्रह्लाद अपनी बात पर अड़े रहे। होलिका, जिसे आग से न जलने का वरदान मिला था, खुद जलकर राख हो गई, और प्रह्लाद को कोई नुकसान नहीं हुआ। इसीलिए होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, और अगले दिन रंगों से होली मनाई जाती है।

इस साल तारीख को लेकर काफ़ी बहस के बाद भी, अब स्थिति साफ़ हो गई है। होलिका दहन 2 मार्च को आधी रात को होगा, और रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

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