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Ganga Dussehra 2019: महाराष्ट्र के इस शहर को कहते हैं 'विदर्भ की काशी', आज भी भगवान राम यहां देते हैं साक्षात दर्शन

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 12, 2019 11:20 IST

विदर्भ की काशी के रुप मे अपनी पहचान रखने वाले रामटेक का भगवान श्री राम से भी अहम जुड़ाव है। गंगा दशहरा के मौके पर हर साल यहां विशेष आयोजन होते हैं।

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ठळक मुद्देमहाराष्ट्र के रामटेक में गंगा दशहरा के मौके पर हर साल होता है विशेष आयोजनरामटेक का पौराणिक महत्व भी है, मान्यता के अनुसार भगवान राम वनवास के दौरान यहां रूके थे

गंगा दशहरा का त्योहार पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस मौके पर हरिद्वार से लेकर गढ़मुक्तेश्वर और वाराणसी तक मां गंगा में डुबकी लगाने की कहानी तो सभी जानते हैं, लेकिन आज हम आपको महाराष्ट्र के एक और शहर के बारे में बताने जा रहे हैं। यहां भी गंगा दशहरा के मौके पर हर साल विशेष आयोजन किये जाते हैं। हम महाराष्ट्र के रामटेक की बात कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के रामटेक शहर के अंबाला तालाब पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ गंगा दशहरा महोत्सव का बुधवार (12 जून) को समापन किया जाएगा। भारतीय जनसेवा मंडल के अध्यक्ष संत गोपाल बाबा के मार्गदर्शन में गत 18 वर्षों से यह आयोजन किया जा रहा है। विदर्भ की काशी के रुप मे अपनी पहचान रखने वाले रामटेक के अंब कुंड (अंबाला तालाब) में स्थानीय पंडितों एवं धार्मिक संगठनों की ओर कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा।

इसके बाद शाम 4 बजे से जोस म्युजिक ग्रुप कामठी की ओर से भजन संध्या होगी। 12 जून को दोपहर 3.30 बजे महर्षि अगस्ति आश्रम की अखंड ज्योति से ज्योति प्रज्वलित कर ज्योति यात्रा निकाली जाएगी जो शाम 6.30 बजे अंबाला तालाब पहुंचेगी। 

रामटेक का भगवान राम से विशेष जुड़ाव 

महाराष्ट्र के नागपुर से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित रामटेक का भगवान राम से भी विशेष जुड़ाव है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम यहां अपने वनवास काल में रूके थे। इस वजह से भी इसे रामटेक कहा जाता है। इसके बारे में यह भी कहा जाता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान अपनी पहली रसोई यहां बनाई थी। साथ ही श्रीराम ने पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहां के सभी ऋषि-मुनियों को भोजन कराया था। 

कहा जाता है कि यही वह स्थान भी जहां राम को रावण के बारे में जानकारी मिली थी और उन्होंने सभी रक्षसों के वध की प्रतिज्ञा ली थी। मान्यताओं के अनुसार श्रीराम ने इसी स्थान पर अगस्त्य ऋषि से शस्त्र ज्ञान लिया था। यहां एक भव्य मंदिर भी है जिसका निर्माण मराठा काल में हुआ। इसका निर्माण नागपुर के राजा रघुजी भोंसले ने 18वीं सदी में कराया था। 

रामटेक में दिखता है भगवान राम का अक्स

रामटेक में स्थित भगवान राम के मंदिर से जुड़ी एक मान्यता है कि यहां आज भी श्रीराम का अक्स कई बार दिख जाता है। कई लोगों ने इस बारे में दावे किये हैं। कहा जाता है कि बारिश के दौरान जब भी यहां बिजली चमकती है तो मंदिर के शिखर पर ज्योति प्रकाशित होती है। मान्यता है कि उस ज्योति में श्रीराम प्रकट होते हैं। कई लोगों ने ऐसे दावे किये हैं कि उन्हें चमत्कारी ज्योति के दर्शन हुए।

टॅग्स :दशहरा (विजयादशमी)महाराष्ट्रहिंदू त्योहार
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