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खजुराहो संग इन मंदिरों की मूर्तियां देती हैं एक धार्मिक संदेश जिसे हर किसी को समझना चाहिए

By गुलनीत कौर | Updated: January 2, 2018 12:58 IST

देखें 7 ऐसे मंदिर जो आस्था के नाम पर किसी ना किसी हिन्दू देवता से तो जुड़े हैं लेकिन यहां का दृश्य हैरान करने लायक है।

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भारतीय संस्कृति में आज भी 'सेक्स' या 'संभोग' जैसे नामों को खुलेआम लेना सही नहीं माना जाता है। परिवार में सबके सामने इस बारे में बात नहीं कर सकते हैं। इससे जुड़ी बातों को बंद दरवाजे के भीतर ही रखा जाता है। लेकिन यही वो देश है जहां के सबसे बड़े धर्म हिन्दू धर्म में 'काम' (लस्ट) के देवता कामदेव भी हैं। 

भारतीय संस्कृत और धार्मिक ग्रंथों में कामदेव और उनके प्रभाव  से जुड़े ढेरों किस्से-कहानियां हैं। इसके बावजूद भी लोग इस विषय पर खुलेआम चर्चा करने से घबराते हैं। संभोग का नाम लेने में भी शर्मिंदगी महसूस करते हैं। यही कारण है कि संभोग को दर्शाती हिन्दू मंदिरों की मूर्तियों पर लोग सवाल उठाते हैं। 

आज हम आपको कुल सात ऐसे मंदिरों के बारे में बताएंगे जो आस्था के नाम पर किसी ना किसी हिन्दू देवता से तो जुड़े हैं लेकिन यहां का दृश्य देख हर कोई चकित रह जाता है और सबके मन में एक ही सवाल आता है कि 'आखिरकार ऐसी मूर्तियां यहां क्यों बनी हैं'? 

खजुराहो, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर धर्म और काम के परस्पर संबंध को दर्शाने वाले शायद सबसे लोकप्रिय मंदिर हैं। माना जाता है कि बाल्यावस्था में भगवान शिव संग अन्य कई देवता इस स्थान पर आए थे। यह मंदिर अपनी भव्य शिल्प के लिए जाना जाता है। हिन्दू धर्म के चार पुरुषार्थों - धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का समन्वय इस मंदिर में देखा जा सकता है। इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर 'काम' को दर्शाती मूर्तियां यहां के पर्यटकों को सबसे अधिक आकर्षित करती हैं। 

कोणार्क का सूर्य मंदिर

कोणार्क सूर्य मंदिर या 'ब्लैक पैगोडा' विश्व के सबसे सुन्दर और भव्य सूर्य मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का अधिकतम हिस्सा प्राकृतिक आपदाओं के चलते ध्वंस हो गया है। माना जाता है कि इस मंदिर में वास्तु दोष के चलते ऐसा हुआ है। यह मंदिर विश्व भर में अपनी 'मैथुन' मूर्तियों के लिए प्रसिद्द है। मान्यता है कि मनुष्य की उत्पत्ति काम से होती लेकिन जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पाने के लिए उसका इससे मुक्त होना आवश्यक है।

जगदीश मंदिर, उदयपुर

जगदीश मंदिर को जगन्नाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह उदयपुर के प्रसिद्द मंदिरों में से एक है। यह तीन मंजिला मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर का अधिकतम हिस्सा काले पत्थरों से बना है। मंदिर की दीवारों पर महाराणा जगत सिंह के साम्राज्य की झलक देखने को मिलती है। यहाँ की दीवारों पर भी कामरत मूर्तियां हैं।

पदावली, मध्य प्रदेश

चम्बल नदी के पास पड़ती है एक जगह जहां पदावली के कई सारे मंदिर हैं। यूं तो इन मंदिरों में से कई मंदिर प्राक्रतिक आपदाओं और देखभाल ना होने के कारण ढह गए हैं लेकिन मंदिर की दीवारों पर बनी आकृतियां अभी भी सही सलामत हैं। कुछ आकृतियां उस जमाने की कहानियों को बयां करती हैं तो वहीं कुछ पर 'संभोग' को दर्शाती आकृतियां बनी हुई हैं। 

विरूपाक्ष, हम्पी

कर्नाटक के हम्पी में स्थित विरुपाक्ष मंदिर को यूनेस्को ने 'वर्ल्ड हेरिटेज साईट' का तबका दिया है। यह एक शिव मंदिर है। इसकी वास्तुकला को देखने दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों पर रति को दर्शाती मूर्तियां बनी हुई हैं। 

एलोरा का कैलाश मंदिर

विश्व भर से पर्यटक एलोरा में बने मंदिरों की उन मूर्तियों को देखने आते हैं जिनका अर्थ भी वे शायद समझते ना हों। इन मूर्तियों को देख कर लगता है मानो भारत देश 'काम' और 'संभोग' का प्रदर्शन कर रहा है लेकिन धार्मिक रूप से इसका अर्थ कुछ और ही है। विभिन्न इतिहासकारों का कहना है कि यहां के कैलाश मंदिर की दीवारों पर बनी मूर्तियों को यदि बहुत ध्यान से देखा जाए और अपने जहन में बिठा लिया जाए तो किसी का 'काम' और 'संभोग' से मन उठ सकता है। और यही इन मूर्तियों का मकसद है ताकि मनुष्य मोक्ष प्राप्ति की ओर अपने कदम बढ़ा सके। 

रणकपुर, राजस्थान

राजस्थान में स्थित रणकपुर मंदिर एक जैन मंदिर है जो कि पहले जैन तीर्थंकर को समर्पित माना जाता है। इस मंदिर के इस लिस्ट में होने पर हैरानी होती है लेकिन मंदिर की बाहरी दीवारों पर संभोग रत जोड़ों की मूर्तियां इस बात की मिसाल हैं कि भारतीय संभोग को जीवन का अभिन्न अंग समझते रहे हैं। इस मंदिर की एक खास बात ये है भी है कि यहाँ की कोई भी दो मूर्तियाँ एक जैसी नहीं हैं।

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