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Devshayani Ekadashi 2022: देवशयनी एकादशी व्रत कल, जरूर करें ये 4 काम, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा के नियम

By रुस्तम राणा | Updated: July 9, 2022 15:15 IST

धार्मिक दृष्टि से यह एकादशी तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी दिन से ही चतुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं और चतुर्मास की अवधि में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।

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Devshayani Ekadashi 2022: देवशयनी एकादशी व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा। यह व्रत हर साल आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु इसी एकादशी तिथि से अगले चार माह तक निद्रासन में चले जाते हैं। इसलिए शास्त्रों में इसे हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से यह एकादशी तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी दिन से ही चतुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं और चतुर्मास की अवधि में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। जब चतुर्मास कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के बाद एक बार फिर मंगल कार्य शुरू कर दिए जाते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन कुछ विशेष कार्यों का विचार किया जाता है। आइए जानते हैं क्या हरिशयनी एकादशी से जुड़े नियम -

1.  देवशयनी एकादशी के दिन आप भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं। खीर में तुलसी का पत्ता डाल दें। इससे श्रीहरि विष्णु आप पर प्रसन्न होंगे और मनोकामनाएं पूरी होंगीष ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी का पत्ता न तोड़ें। एक दिन पहले तोड़ सकते हैं।

2. हरिशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। कहते हैं पंचामृत जगत के पालनहार को बेहद प्रिय है। प्रसाद के रूप में भी पंचामृत को ग्रहण करना चाहिए। इससे आप पर भगवान विष्णु की कृपा होगी। धन-धान्य में वृद्धि के साथ मनोकामनाएं भी पूर्ण होंगी।

3. देवशयनी एकादशी के दिन दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से जातकों को अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं। साथ ही पूजा के पश्चात पीले चावल, चने की दाल, केला, गुड़, पीले वस्त्र आदि का दान करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना पूर्ण होती है।

4. हरिशयनी एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। ऐसा करने से आप पर भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि बनी रहेगी।

देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि की शुरूआत 09 जुलाई दिन शनिवार को शाम 04 बजकर 39 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन 10 जुलाई रविवार को दोपहर 02 बजकर 13 मिनट तक व्रत पारण मुहूर्त - 11 जुलाई सोमवार को प्रात: 05 बजकर 31 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 17 मिनट के मध्य

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