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Chandra Grahan: सूतक क्या होता है, क्या है इसे लेकर मान्यता और क्यों नहीं करना चाहिए इस अवधि में कोई भी शुभ काम?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 6, 2020 15:21 IST

Lunar Eclipse: चंद्र ग्रहण हो या फिर सूर्य ग्रहण, दोनों ही समय सूतक लगते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किये जाने चाहिए।

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ठळक मुद्देमान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण, दोनों ही मौके पर लगते है लगते हैं सूतकसूतक के दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती हैसूर्य ग्रहण के समय 12 घंटे और चंद्र ग्रहण के दौरान 9 घंटे पूर्व से ही सूतक काल आरंभ हो जाता है

Lunar Eclipse 2020 (Chandra Grahan): हिंदू धर्म में ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। इस दौरान कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। इस बार चंद्र ग्रहण 10 जनवरी, 2020 की रात को है और इसका सूतक काल दिन में ही शुरू हो जाएगा। सूतक को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि सूतक क्या होता है, इसे लेकर किस तरह की मान्यताएं हैं और क्यों ऐसा कहा जाता है कि सूतक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

Lunar Eclipse: सूतक क्या है

चंद्र ग्रहण हो या फिर सूर्य ग्रहण, दोनों ही समय सूतक लगते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किये जाने चाहिए। यहां तक कि मू्र्ति स्पर्श की भी मनाही होती है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिये जाते हैं।

मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के समय 12 घंटे और चंद्र ग्रहण के दौरान 9 घंटे पूर्व से ही सूतक काल आरंभ हो जाता है और ग्रहण खत्म होने तक यह जारी रहता है। ग्रहण के बाद घरों और मंदिरों की की अच्छे से साफ-सफाई और स्वयं के स्नान आदि के बाद ही पूजा-पाठ और दूसरे काम आरंभ करने चाहिए।

Lunar Eclipse: सूतक क्या होता है, क्यों नहीं करें इस दौरान शुभ काम

मान्यताओं के अनुसार सूतक वह समय होता है जब कोई शुभ काम करने की मनाही होती है। सूतक काल सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण दोनों ग्रहणों के दौरान लगता है। साथ ही किसी घर में शिशु के जन्म या किसी के निधन के बाद भी उस परिवार के सदस्यों को कुछ दिन सूतक की स्थिति में बिताने होते हैं। 

मान्यताओं के अनुसार निर्धारित अवधि में शुभ कार्य मसलन विवाह, धार्मिक कृत्य या मूर्ति स्पर्श और पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए। हिंदू धर्म के अनुसार जन्म और मरण के समय मन सहज स्थिति में नहीं होते। ऐसी अस्त-व्यस्त मानसिकता में पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए।

Chandra Grahan: ग्रहण के सूतक में क्या नहीं करें

मान्यता है कि ग्रहण के पहले से ही नकारात्मक उर्जा वातावरण में फैलने लगती है। इसे ही सूतक कहते हैं। इसलिए शुभ कार्य बिल्कुल नहीं करने चाहिए। गर्भवती स्त्रियों को विशेष ध्यान रखना चाहिए।

ऐसी मान्यता है इस दौरान बच्चे पर बुरा साया पड़ सकता है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान काटने-छाटने वाले काम नहीं करने चाहिए। चाकू, ब्लेड, कैंची जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करें। मान्यता है कि इससे गर्भ में पल पहे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है और वह पूर्ण विकसीत नहीं हो पाता है। 

मान्यता है कि ग्रहण के दौरान कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। जरूरत पड़ने पर बीमार या बच्चे केवल उन्हीं खानों का इस्तेाल कर सकते हैं जिस पर तुलसी पत्ता पहले से रखा गया हो। ग्रहण के दौरान भोजन पकाने की भी मनाही होती है। साथ ही ग्रहण के दौरान यौन संबंध बनाने  से भी बचना चाहिए।

Chandra Grahan: कितने बजे से है चंद्र ग्रहण और कब शुरू होगा सूतक काल

चंद्र ग्रहण का प्रारंभ इस बार 10 जनवरी की रात को 10.39 बजे से हो रहा है। यह करीब चार घंटे का रहेगा। इस लिहाज से ग्रहण का समापन उसी रात 2.20 बजे होगा। इस ग्रहण को भारत समेत यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकेगा। चूकी चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है इसलिए इस ग्रहण का सूतक भी 10 जनवरी को दोपहर 1.30 बजे से शुरू हो जाएगा और ये ग्रहण खत्म होने के बाद ही समाप्त भी होगा।

टॅग्स :चन्द्रग्रहण
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