Holi in Uttarakhand 2026: मथुरा-काशी तो बहुत हुए, इस बार देवभूमि में मनाए होली का त्योहार; यादगार रहेगा हर पल

By अंजली चौहान | Updated: February 26, 2026 12:19 IST2026-02-26T12:19:04+5:302026-02-26T12:19:38+5:30

Holi in Uttarakhand 2026: होली भारत के सबसे आनंदमय और रंगीन त्योहारों में से एक है। यह प्रेम, एकता, क्षमा और वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।

Best Places to Celebrate Holi 2026 in Uttarakhand know how many types of Holi are celebrated in Uttarakhand | Holi in Uttarakhand 2026: मथुरा-काशी तो बहुत हुए, इस बार देवभूमि में मनाए होली का त्योहार; यादगार रहेगा हर पल

Holi in Uttarakhand 2026: मथुरा-काशी तो बहुत हुए, इस बार देवभूमि में मनाए होली का त्योहार; यादगार रहेगा हर पल

Holi in Uttarakhand 2026:होली का त्योहार पूरे भारत में बड़े ही मौज-मस्ती और खुशी के साथ मनाया जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक, अलग-अलग परंपराओं को साथ लेकर रंगों के त्योहार को सेलिब्रेट किया जाता है। मथुरा, बरसाना और काशी की होली को वर्ल्ड फेमस है और यहां आप एक न एक बार जरूर गए होंगे लेकिन क्या आप उत्तराखंड की होली के बारे में पता है? जी हां, देवभूमि उत्तराखंड में अनोखे तरीके से होली मनाई जाती है जिसका इतिहास काफी पुराना है। तो चलिए बताते हैं आपको इसके बारे में...,

उत्तराखंड की होली अन्य राज्यों से बिल्कुल अलग है। यहाँ का उत्सव केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि संगीत, अध्यात्म और प्रकृति का मेल है। उत्तराखंड में होली का इतिहास और इसके प्रकार काफी अनूठे हैं।

1- बैठकी होली

ऐसा माना जाता है कि कुमाऊं की 'बैठकी होली' का जन्म तब हुआ जब चंद राजाओं के दरबार में मुगल दरबार के संगीतकार और गायक आए। उन्होंने ब्रज की होली के गीतों को भारतीय शास्त्रीय संगीत (रागों) के साथ मिलाकर एक नया रूप दिया। यह होली का सबसे परिष्कृत और शास्त्रीय रूप है। यह पौष (दिसंबर-जनवरी) के महीने से ही शुरू हो जाती है। लोग एक घर या मंदिर के प्रांगण में इकट्ठा होते हैं और हारमोनियम व तबले की थाप पर होली के गीत गाते हैं। ये गीत शास्त्रीय रागों (जैसे राग काफी, पीलू, झिंझोटी, और खमाज) पर आधारित होते हैं। इसमें आध्यात्मिकता, विरह और भक्ति का पुट होता है। इसे 'निर्वाण की होली' भी कहा जाता है।

2- गढ़वाली होली

त्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का एक पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव है, जो फाल्गुन शुक्ल एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है। इसमें होली की शुरुआत 'चीर' (पैया, मेहल या चीड़ की टहनी) को रंग-बिरंगे कपडों से सजाकर स्थापित करने से होती है, जिसे पूर्णिमा की रात को जलाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। गढ़वाली होली में शास्त्रीय रागों पर आधारित 'बैठी होली' और ढोल-दमाऊ के साथ नृत्य करते हुए गाई जाने वाली 'खड़ी होली' दोनों प्रचलित हैं। यह त्योहार गांव के पंचायत चौक पर मनाया जाता है, जहाँ लोग स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और परंपरा के अनुसार एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हैं।

3- खड़ी होली

यह होली फाल्गुन के महीने में शुरू होती है और मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में प्रचलित है। इसमें पुरुष सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर टोपी पहनकर घेरा बनाकर नाचते हुए गाते हैं। इसमें हुड़का (पहाड़ी ढोलक) मुख्य वाद्य यंत्र होता है। ड़ी होली बहुत ही ऊर्जावान होती है। टोली एक घर से दूसरे घर जाकर आशीर्वाद देती है और सामूहिक नृत्य करती है।

4- महिला होली 

जैसा ही इसके नाम से पता चल रहा है ये महिलाओं द्वारा आयोजित की जाती है। महिलाएँ समूहों में एकत्रित होकर विशेष रूप से महिलाओं के अनुभवों, हंसी-मजाक और कृष्ण-राधा के प्रेम पर आधारित गीत गाती हैं। इसमें नाच-गाना और ठिठोली का माहौल रहता है, जिससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं।

उत्तराखंड में होली मनाने के लिए सबसे अच्छी जगहें

1- हरिद्वार - गंगा किनारे होली का दिल

नदी के किनारे होली की इतनी ज़ोरदार मस्ती के लिए भारत में कोई भी जगह हरिद्वार जैसी नहीं है। यहाँ होली का जश्न घाटों से शुरू होता है, सबसे मशहूर हर की पौड़ी, जहाँ हज़ारों लोग होली खेलने के लिए इकट्ठा होते हैं और फिर खुशी से गंगा को अपने रंग चढ़ाते हैं। होली के बाद शाम की गंगा आरती किसी जादू से कम नहीं होती हज़ारों दीये पानी पर तैरते हैं और गुलाल हवा में उड़ता है।

परिवारों और लग्ज़री यात्रियों के लिए, हरिद्वार का सबसे बड़ा फ़ायदा यहाँ रहने के कई ऑप्शन हैं, बुटीक हेरिटेज स्टे से लेकर वर्ल्ड-क्लास रिवरसाइड रिज़ॉर्ट तक। परिवारों के लिए गंगा नदी के पास हरिद्वार में सबसे अच्छे होटल घाटों के पास होने के साथ-साथ प्राइवेसी और आराम का भी मज़ा देते हैं ताकि दिन भर की मस्ती के बाद आराम किया जा सके।

2- ऋषिकेश - योग वाली होली

ऋषिकेश में होली ज़्यादा आराम से लेकिन उतनी ही खूबसूरती से मनाई जाती है। बीटल्स आश्रम एरिया, लक्ष्मण झूला और गंगा किनारे के बीच इनफ़ॉर्मल कैनवस बन जाते हैं। योगा रिट्रीट में स्पेशल होली सेशन होते हैं, जिसमें ब्रीदवर्क, मेडिटेशन और माइंडफुल सेलिब्रेशन शामिल होते हैं। अगर आप बाहर सेलिब्रेशन के साथ-साथ अंदर से भी खुश होना चाहते हैं, तो ऋषिकेश आपके लिए सही जगह है।

3- मसूरी और हिल स्टेशन -बादलों में होली

होली पर मसूरी का कॉलोनियल आर्किटेक्चर पेस्टल रंग का हो जाता है, और पीछे हिमालय की धुंध छा जाती है। यहां का सेलिब्रेशन शांत, फैमिली-फ्रेंडली होता है, और इसमें बसंत में खिले हिल स्टेशन का चार्म होता है चेरी ब्लॉसम और रोडोडेंड्रोन गुलाल का एक पैकेट खुलने से पहले ही नेचुरल रंग दे देते हैं।

4- राजाजी नेशनल पार्क - जंगल होली

एडवेंचर पसंद करने वाले ट्रैवलर के लिए, राजाजी नेशनल पार्क के बफर ज़ोन के पास होली मनाना एक यादगार अनुभव है। राजाजी नेशनल पार्क के पास सबसे अच्छे रिसॉर्ट सुबह वाइल्डलाइफ सफारी और दोपहर तक त्योहारों का अनोखा कॉम्बिनेशन देते हैं एक ऐसी होली जहां सुबह आपके साथी हाथी और बाघ होते हैं, और दोपहर में आपके परिवार और दोस्त होते हैं।
 

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