कार्तिक के महीने में त्योहारों की बाढ़ सी आ जाती है। इसी त्योहारों में से एक है जिसे आवंला नवमी के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी मनाई जाती है। जिसे अक्षय नवमी भी कहते हैं। इस साल यह आवंला नवमी 5 नवंबर को पड़ रही है।
शास्त्रों की मानें तो इस दिन आवंले के पेड़ के नीचे बैठने और उसी के नीचे भोजन करने से रोगों का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है।
इस दिन को प्रकृति के पर्व के नाम से भी जाना जाता है। लोग इस दिन प्रकृति को आभार प्रकट करते हैं। इस दिन किया गया तप, जप ,दान इत्यादि व्यक्ति को सभी कष्टों से मुक्त करता है तथा सभी मनोकामनाओं की पूर्ती करने वाला होता है।
अक्षय नवमी की पूजा विधि
1. अक्षय नवमी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके पूजा करने का संकल्प लें।2. आंवले के वृक्ष के निकट पूर्व मुख होकर , उसमे जल डालें।3. वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें , और कपूर से आरती करें।4. इसके बाद वृक्ष के नीचे निर्धनों को भोजन कराएं , स्वयं भी भोजन करें।5. प्रार्थना करें कि आंवले की पूजा से आपको सुख,समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिले।
क्या है शुभ मुहूर्त
अक्षय नवमी तिथि- 5 नवंबर 2019अक्षय नवमी पुरवाहना का समय- 06:39 AM से 12:10 PM तकनवमी तिथि प्रारम्भ- 04:57 AM, Nov 05, 2019नवमी तिथि समाप्त- 07:21 AM, Nov 06, 2019