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बजरंग और विनेश से कुश्ती में पदक की उम्मीद, रवि दाहिया भी मजबूत दावेदार

By भाषा | Updated: August 2, 2021 16:05 IST

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तोक्यो, दो अगस्त भारत के सात पहलवान तोक्यो खेलों में जब अपने अभियान की शुरुआत करेंगे तो सभी की नजरें बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट पर टिकी होंगी जिन्होंने ओलंपिक से पहले शानदार प्रदर्शन करके पदक की उम्मीदें जगाई हैं।

कुश्ती में भारत के अभियान की शुरुआत मंगलवार को यहां सोनम मलिक करेंगी।

कुश्ती में भारत को तीन पदक की उम्मीद है और अगर पहलवान तीन पदक जीतने में नाकाम रहते हैं तो इसे कमतर प्रदर्शन माना जाएगा।

बजरंग (65 किग्रा फ्रीस्टाइल) और विनेश (महिला 53 किग्रा) के अलावा रवि दाहिया (57 किग्रा फ्रीस्टाइल) से अगले कुछ दिनों में कुश्ती के मैट पर पदक जीतने की उम्मीद है।

भारत की ओर से 19 साल की सोनम सबसे पहले महिला 62 किग्रा वर्ग में चुनौती पेश करने उतरेंगी। उन्हें एशियाई चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू से भिड़ना है।

सोनम और 19 साल की एक अन्य पहवान अंशू मलिक दोनों सीनियर सर्किट पर नई खिलाड़ी हैं और ऐसे में विरोधी खिलाड़ियों को उनके खेल की अधिक जानकारी नहीं है और भारतीय पहलवान विरोधियों को हैरान कर सकती हैं। अंशू ने अच्छा प्रदर्शन किया है और उनके खेल में लगातार सुधार हो रहा है।

इन दोनों ही खिलाड़ियों पर कोई दबाव नहीं है और अगर ये पदक के बिना भी लौटती हैं तो इन्हें भविष्य में यहां मिलने वाले अनुभव से फायदा ही होगा।

सीनियर पहलवान विनेश अपनी स्पर्धा में शीर्ष वरीय पहलवान के रूप में उतरेंगी और जापान की मायू मुकाइदा के अलावा वह सभी विरोधियों को हराने में सक्षम हैं। विनेश के वर्ग में प्रतिस्पर्धा हालांकि काफी कड़ी होगी।

विनेश का डिफेंस बेहतर हुआ है और उनकी पलटवार करने की क्षमना का कोई सानी नहीं है। उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में खिताब जीतने के दौरान इसे दिखाया भी है।

एशियाई चैंपियनशिप और अन्य प्रतियोगिताओं में हालांकि जापान और चीन की पहलवानों ने हिस्सा नहीं लिया था।

पुरुष वर्ग में भारतीय चुनौती की अगुआई बजरंग करेंगे जो विश्व स्तर पर काफी सम्मानित पहलवान हैं। बजरंग ने अपने पिछले 10 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में छह स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीता है।

बजरंग का स्टेमिना उनका पलड़ा भारी करता है लेकिन उनके पैर के रक्षण की परीक्षा होगी। उनके वर्ग में काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा है और कम से कम पांच से छह पहलवान स्वर्ण पदक जीतने में समक्ष हैं।

रवि भी पदक के दावेदार हैं। उनके पास मजबूती और स्टेमिना है जबकि उनका तकनीकी पक्ष भी मजबूत है। उनके अपने अधिकतर मुकाबले तकनीकी दक्षता के आधार पर जीते हैं। उनके वर्ग में रूस ओलंपिक समिति के जावुर उगयेव और तुर्की के सुलेमान अतली मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं।

प्रतियोगिता में खेलने का समय मिलने के लिहाज से दीपक पूनिया (86 किग्रा फ्रीस्टाइल) संभवत: पूरी तैयारी के साथ नहीं उतर रहे।

विश्व चैंपियनशिप 2019 के रजत पदक विजेता दीपक ने विश्व कप 2020 के बाद से प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है। वह बाईं कोहनी की चोट से उबर रहे थे और पोलैंड ओपन से उन्होंने नाम वापस ले लिया। ओलंपिक से पहले पोलैंड ओपन आखिरी प्रतियोगिता थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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