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छत्तीसगढ़ में बालिका की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में युवक को फांसी की सजा

By भाषा | Updated: September 14, 2021 14:58 IST

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राजनांदगांव, 14 सितंबर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की अदालत ने साढ़े तीन वर्ष की बालिका की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में 28 वर्षीय युवक को फांसी की सजा सुनाई है।

राजनांदगांव जिले के विशेष लोक अभियोजक परवेज अख्तर ने मंगलवार को यहां बताया कि सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) शैलेश शर्मा की अदालत ने बालिका से बलात्कार के बाद हत्या के मामले में शेखर कोर्राम को फांसी की सजा सुनाई है।

अख्तर ने बताया कि जिले के चिखली पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव में 22 अगस्त 2020 को जब बालिका अपने घर के बाहर खेल रही थी तब शेखर वहां पहुंचा और उसे अपने घर ले गया। वहां शेखर ने बालिका के साथ बलात्कार किया और जब वह रोने लगी तो तकिया के खोल से उसका मुंह और नाक दबाकर हत्या कर दी।

लोक अभियोजक ने बताया कि जब बालिका के परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की तब उन्हें जानकारी मिली कि बालिका को शेखर कोर्राम के साथ देखा गया है।

उन्होंने बताया कि बालिका के परिजनों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने शेखर को गिरफ्तार कर​ लिया और पूछताछ के दौरान शेखर ने बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया।

अख्तर ने बताया कि बाद में पुलिस ने अदालत में शेखर के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद शेखर को मामले का दोषी पाया और उसे भारतीय दण्ड संहिता की धारा 363 के आरोप में सात वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड, धारा 366 के तहत आरोप में 10 वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड, धारा 201 के तहत आरोप में सात वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा छह के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि अभियुक्त ने साढ़े तीन वर्षीय असहाय, बेबस और लाचार बालिका का अपहरण कर उसका बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। यह अपराध जघन्य प्रकृति का है और अभियुक्त किसी भी प्रकार से सहानुभूति का पात्र नहीं है। अदालत ने कहा कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है जो मानवता को शर्मसार करता है। ऐसे अपराधों से आम नागरिक के मन में अपनी संतान के जीवन की सुरक्षा को लेकर आंतरिक छटपटाहट होने लगती है तथा वह सशंकित रहने लगते हैं। जब तक समाज में ऐसे अपराध करने वालों को मृत्युदंड से दण्डित नहीं किया जाएगा तब तक लोगों के मन से यह संशय मिट नहीं सकता।

अदालत ने कहा है कि इस प्रकार के कठोर दण्ड से दण्डित किए जाने पर ही समाज के लोगों और मृतक बच्ची के परिजनों की अदालत के प्रति आस्था और दृढ़ विश्वास होगा कि उनके साथ न्याय हुआ है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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