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योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 23 लाख निर्माण कर्मियों के खातों में भेजे कुल 230 करोड़ रुपये

By भाषा | Updated: June 9, 2021 22:20 IST

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लखनऊ, नौ जून उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के 23 लाख से अधिक श्रमिकों के खातों में आर्थिक सहायता के रूप में कुल 230 करोड़ रुपये ऑनलाइन स्थनांतरित किए।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों, श्रमिकों, युवाओं, कामगारों आदि के हितों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई को आगे बढ़ाने में श्रमिकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों के परिश्रम और पुरुषार्थ के माध्यम से प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री बुधवार को यहां अपने सरकारी आवास पर कोविड-19 के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की आपदा राहत सहायता योजना के तहत राशि भेजने के बाद बोल रहे थे।

एक सरकारी बयान के अनुसार इस योजना के तहत 23 लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों को 1000 रुपये का हितलाभ प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के पंजीकरण हेतु पोर्टल की शुरूआत भी की।

बयान के मुताबिक आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना की प्रथम लहर के दौरान श्रमिकों एवं कामगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण पैकेज की घोषणा की थी। उसी दौरान प्रदेश सरकार ने श्रमिकों एवं कामगारों के हितों के लिए उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग का गठन किया। यह आयोग श्रमिकों के हितों को संरक्षित करने और उन्हें रोजगार प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों के हितों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की पुत्रियों के विवाह हेतु उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित ‘कन्या विवाह सहायता योजना’ के तहत उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा तथा स्वास्थ्य के लिए हर स्तर पर राज्य सरकार मदद कर रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल कोविड-19 के करण 40 लाख से अधिक श्रमिक/कामगार विभिन्न राज्यों से उत्तर प्रदेश में आए थे जिनके लिए सूखे राशन व सामुदायिक रसोईघर के माध्यम से तैयान भोजन की व्यवस्था की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अभियान चलाकर जरूरतमन्दों को राशन कार्ड बनाने का कार्य किया। साथ ही, देश में किसी भी अन्य स्थान पर राशन उपलब्ध कराने के लिए राशन कार्ड को नेशनल पोर्टिबिलिटी के साथ जोड़ा गया। उत्तर प्रदेश देश के उन चुनिन्दा राज्यों में है जिसने यह व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखकर बनायी गयी योजनाओं का परिणाम है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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