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कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले येदियुरप्पा भावुक नजर आये

By भाषा | Updated: July 26, 2021 17:39 IST

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बेंगलुरु, 26 जुलाई कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले बी एस येदियुरप्पा सोमवार को भावुक नजर आये और उन्होंने अपने कार्यकाल को ‘‘अग्नि परीक्षा’’ के रूप में बताया।

राज्य में कई महीनों से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें थी और येदियुरप्पा ने उनकी सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर आज इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस मौके पर कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्थान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

इस्तीफा देने से पहले येदियुरप्पा ने भावुक होते हुए एवं रुंधे गले से कहा था, ‘‘मेरी बात को अन्यथा मत लीजिएगा, आपकी अनुमति से... मैंने फैसला किया है कि मैं मध्याह्न भोजन के बाद राजभवन जाऊंगा और मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौपूंगा।’’

उन्होंने कहा था, ‘‘मैं दु:खी होकर नहीं, बल्कि खुशी से ऐसा कर रहा हूं।’’

येदियुरप्पा ने 75 साल से अधिक आयु होने के बावजूद उन्हें दो साल मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा का धन्यवाद किया।

भाजपा में 75 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को निर्वाचित पदों से बाहर रखने का अलिखित नियम है।

येदियुरप्पा ने इसके बाद राजभवन जाकर राज्यपाल थावरचंद गहलोत को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।

भाजपा के सत्ता में आने और उनके मुख्यमंत्री बनने के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए येदियुरप्पा ने कहा कि वह 2023 के चुनावों के दौरान 225 में से 125-130 सीटें हासिल करके पार्टी को सत्ता में वापस लाने का प्रयास करेंगे।

अपने कार्यकाल को ‘‘अग्नि परीक्षा’’ के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने कार्यभार संभाला (दो साल पहले मुख्यमंत्री के रूप में), मुझे केंद्र द्वारा (भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा) कैबिनेट का गठन करने की अनुमति नहीं दी गई थी, सूखा था और फिर बाढ़ आ गई थी और मुझे हर जगह अकेले यात्रा करनी पड़ी.. बाद में कैबिनेट का गठन हुआ, और फिर पिछले डेढ़ साल से कोविड संकट है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस अग्नि परीक्षा के बावजूद, सभी के सहयोग से, मैंने राज्य के कल्याण के लिए कुशलता से काम किया है और मैंने अपनी सीमा से परे जाकर प्रयास किए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर से मेरी बस यही प्रार्थना है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह जीतें और देश की सेवा करने और भारत को मजबूत बनाने के लिए सत्ता में वापस आएं, यह लोगों की भी राय है।’’

येदियुरप्पा ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि आज के घटनाक्रम को राज्य और देश के लोग ध्यान से देख रहे हैं। उन्होंने याद किया कि एक समय था जब कोई भी उनसे या अन्य कार्यकर्ताओं से उस समय बात करने के लिए तैयार नहीं था, जब वह शिकारीपुरा तालुक (उनके निर्वाचन क्षेत्र) में आस-पास के क्षेत्रों से मार्च आयोजित करके पार्टी बनाने के लिए काम कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘उस समय हमारे पास विधानसभा में भी कोई नहीं था और मैं अकेला था क्योंकि पार्टी के एक अन्य विधायक वसंत बंगेरा ने इस्तीफा दे दिया था। मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और इस बात की चिंता नहीं की कि मैं अकेला था और लोगों की भलाई के लिए अपना काम करना जारी रखा।’’

उन्होंने शिवमोगा के शिकारीपुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रचारक के रूप में अपने काम और पुरसभा अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया। जब वह पुरसभा के अध्यक्ष थे, उस समय अपने ऊपर हुए एक ‘‘घातक’’ हमले को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (अपराधियों) सोचा कि मैं खत्म हो गया और चला गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब मेरी पत्नी और बच्चे मुझसे मिलने आए, तो मैंने उनसे कहा कि मेरा जीवन राज्य के लोगों को समर्पित है।’’ उन्होंने जनसंघ कार्यकर्ता के रूप में अपने उन दिनों को याद किया जब उन्होंने किसान और दलित आंदोलनों में भाग लिया था।

येदियुरप्पा ने याद किया, ‘‘अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे, तो उन्होंने मुझे केंद्रीय मंत्री बनने के लिए कहा, तो मैंने भावुक होते हुए वाजपेयी से कहा कि मैं कर्नाटक में भाजपा का निर्माण करना चाहता हूं और ‘कोई कारण नहीं है कि मैं दिल्ली आऊं’ और उनसे आग्रह किया कि उन्हें पार्टी बनाने की अनुमति दें।’’

उन्होंने कहा, एक समय था जब वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी या मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं का राज्य का दौरा होता था तो 300-400 लोगों को इकट्ठा करने में भी बड़ी कठिनाई होती थी। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, मैंने संगठन के निर्माण के लिए राज्य भर में यात्रा की और राष्ट्रीय नेताओं के सहयोग से पार्टी का विकास उस स्तर तक हुआ, जिस स्तर पर वह आज सत्ता में है।’’

पार्टी के विकास में लाखों लोगों के प्रयासों को धन्यवाद देते हुए, भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि एक समय था जब उनके पास कार नहीं थी और उन्होंने और अन्य नेताओं ने पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए साइकिल पर यात्रा की थी।

मंत्री के एस ईश्वरप्पा सहित अपने लंबे समय से पार्टी के सहयोगियों का नाम लेते हुए उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य होता है जब मैं आज सोचता हूं कि जब कोई नहीं था, तो हमने पार्टी बनाने की कोशिश की। आज पार्टी तेजी से आगे बढ़ रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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