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फरवरी 2025 तक स्वच्छ यमुना के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं : केजरीवाल

By भाषा | Updated: November 18, 2021 17:19 IST

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नयी दिल्ली, 18 नवंबर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि फरवरी 2025 तक यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए उनकी सरकार छह सूत्री कार्ययोजना पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह दिल्ली में यमुना की सफाई के बारे में 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादे को पूरा करेंगे। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यमुना को इतना प्रदूषित होने में 70 वर्ष लगे। 70 वर्षों में हुए नुकसान की भरपाई महज दो दिनों में नहीं की जा सकती। मैंने वादा किया था कि मैं अगले विधानसभा चुनावों तक दिल्ली में यमुना को साफ करूंगा और आप सभी के साथ इसमें डुबकी लगाऊंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम यमुना को स्वच्छ करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। इसे हासिल करने के लिए छह सूत्री कार्य योजना है और मैं निजी तौर पर प्रगति की निगरानी कर रहा हूं।’’ उन्होंने कहा कि नए मलजल शोधन संयंत्र बनाए जा रहे हैं और पुराने संयंत्र को तकनीकी रूप से उन्नत किया जाएगा।

केजरीवाल ने कहा, ‘‘इससे हमारी मलजल शोधन क्षमता लगभग 60 करोड़ गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) अपशिष्ट जल से बढ़कर 750-800 एमजीडी हो जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि यमुना में जिन चार प्रमुख नालों- नजफगढ़, बादशाहपुर, सप्लीमेंट्री और गाजीपुर का पानी आता है, उनकों उनके मूल स्थान पर ही शोधित किया जा रहा है।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने कहा कि सरकार यमुना में औद्योगिक कचरे विसर्जित करने वाले उद्योगों को बंद कर देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘झुग्गी-झोपड़ी’ से आने वाले अपशिष्ट जल को सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिनका पानी अभी यमुना में जाता है। सरकार उन क्षेत्रों में घरेलू ‘कनेक्शन’ उपलब्ध कराएगी जहां सीवर नेटवर्क है। पहले उपभोक्ताओं को ‘कनेक्शन’ खुद लेना पड़ता था।

केजरीवाल ने कहा, ‘‘हमारे अभियंताओं तथा अधिकारियों को उम्मीद है कि हम छह सूत्री कार्ययोजना लागू कर फरवरी 2025 तक यमुना को साफ कर पाएंगे। संबंधित प्रत्येक कार्य के लिए विशिष्ट लक्ष्य तय किए गए हैं, मैं व्यक्तिगत रूप से इसकी प्रगति की निगरानी करूंगा।’’

दिल्ली में एक दिन में लगभग 72 करोड़ गैलन अपशिष्ट जल उत्पन्न होता है। शहर भर में 20 स्थानों पर 35 एसटीपी, 597 एमजीडी तक मलजल का शोधन कर सकते हैं और अपनी क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत उपयोग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि छठ पूजा के अवसर पर यमुना नदी की सतह पर तैरते झाग में पूजा करते व्रतियों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली में सत्तारूढ़ आप और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है।

वजीराबाद और ओखला के बीच यमुना का 22 किलोमीटर का क्षेत्र इस नदी के करीब 80 प्रतिशत प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। यह यमुनोत्री से निकलकर इलाहाबाद तक फैली 1,370 किलोमीटर लंबी नदी का दो प्रतिशत से भी कम हिस्सा है।

वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार, यमुना में झाग की प्राथमिक वजह डाई उद्योग में इस्तेमाल फोस्फेट की उच्च मात्रा, दिल्ली, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के घरों और धोबी घाट पर इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट है। ‘कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ (सीईटीपी) और एसटीपी की जलशोधन की खराब गुणवत्ता अन्य कारण हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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