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Coronavirus कर्मी अपने-अपने तरीके से लड़ रहे लड़ाई, घर जाकर करते हैं नियम का पालन

By भाषा | Updated: April 17, 2020 21:42 IST

डॉक्टरों के बाद अगर कोई कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं तो वो पुलिसकर्मी और सुरक्षा गार्ड्स हैं। ये कोविड-19 (COVID-19) के खिलाफ अपने-अपने तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं।

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ठळक मुद्देकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना वायरस से 437 मरीजों की मौत हो चुकी है और 13,387 लोग संक्रमित हैं।कोविड-19 के खिलाफ अपने-अपने तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं कर्मी।

नई दिल्ली: नोएडा में एक ऊंची इमारत के सामने खड़ा एक सुरक्षा गार्ड मरीजों को देखने के लिए निकले डॉक्टर को सलाम करता है।

दरअसल ये दोनों कोविड-19 (COVID-19) के खिलाफ अपने-अपने तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं और जब ये दोनों घर लौटते हैं तो कड़े पृथक नियम का पालन करते हुए अपने बच्चों को गले तक नहीं लगा पाते। ये लोग ऐसे पेशे के हैं जहां इन्हें हर रोज अपने घर से निकलना पड़ता है। ये कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण योद्धा बने हुए हैं। ऐसे समय में भी हजारों लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने घर से निकलना पड़ता है और निश्चित तौर पर लोगों से मिलना पड़ता है।

ऐसे लोग जब अपने घर लौटते हैं तो कड़ाई से सामाजिक दूरी का पालन करते हैं ताकि अगर वह खुद संक्रमित भी हों तो उनका परिवार इसकी चपेट में न आए। उत्तर प्रदेश के नोएडा में सुरक्षा गार्ड का काम करने वाले राजेश का कहना है, 'यह मुश्किल है, लेकिन इसके अलावा क्या विकल्प है? मैं और डॉक्टर साहब एक ही तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। न तो वो और न मैं अपने बच्चों को गले लगा सकता हूं।' नोएडा से अब तक संक्रमण के 68 मामले सामने आ चुके हैं। गार्ड ने बताया कि कई दिनों से उन्होंने अपने परिवार के साथ खाना तक नहीं खाया है। 

इसी तरह गुड़गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता निर्मला ने कहा कि वह अपने बच्चों के साथ सिर्फ फोन पर बात करती हैं और परिवार के साथ किसी भी संपर्क से दूर रहने के लिए बरामदे में सोती हैं। वहीं दिल्ली के एक अस्पताल में वॉर्ड ब्वॉय के रूप में काम करने वाले 27 वर्षीय राज कुमार अपने घर की छत पर बने सामान रखने वाले कमरे में रहते हैं। उनकी पत्नी सीढ़ियों पर खाना रखकर जाती है और वह वहीं खाना खाते हैं। उन्होंने कहा कि वह जब अस्पताल से लौटते हैं तो सबसे पहले नहाते हैं और फिर स्नानागार साफ करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके नहाने के दो घंटे के बाद तक उस कमरे में कोई प्रवेश न करे। 

वहीं नोएडा में कचरा बीनने वाले पिंकू बताते हैं कि वह अपने घर के बाहर एक खाट पर सोते हैं, उनकी पत्नी वहीं जरूरत का सामान देकर जाती है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें तैयार होने में भी काफी समय लगता है कि क्योंकि अब उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि उन्होंने मास्क और गलव्स सही तरीके से पहन लिए हैं या नहीं। सभी को साफ करके संक्रमण मुक्त करना होता है। पूर्वी दिल्ली की एक डॉक्टर ने बताया कि वह घर पहुंचने से पहले अपनी बेटी को फोन करती हैं जो उनके लिए दरवाजा खोलती हैं और उनके घर में घुसने से पहले ही अंदर चली जाती है। 

वह पहुंचने के तुरंत बाद नहाती हैं। वहीं नाम न जाहिर करने की शर्त पर नोएडा में संक्रमण मुक्त करने का काम करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी कालोनी में लोग उनके साथ बहिष्कृत की तरह व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने पुराने दिनों का काफी याद करते हैं। वह अब बरामदे में सोते हैं और हर संभव दूरी बनाकर रखते हैं। 

सफाई कर्मचारियों के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन का कहना है कि सफाई कर्मचारियों को सिर्फ मास्क दिया गया गया है। संक्रमण से मुक्त रहने के लिए उनके पास सुविधाओं की कमी है। वहीं संक्रमण की अधिकता वाले क्षेत्र में काम करने वाले एक कांस्टेबल ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करते हैं कि यह क्षेत्र पूरी तरह से बंद रहे। 

वह मास्क और गलव्स पहने रहते हैं और लोगों से कालोनी में बात करते समय काफी सतर्क रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में 85 वर्षीय बूढ़ी मां है जिनकी सुरक्षा को देखते हुए अब वह अपने सहकर्मी के यहां रहते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना वायरस से 437 मरीजों की मौत हो चुकी है और 13,387 लोग संक्रमित हैं।

टॅग्स :सीओवीआईडी-19 इंडियाकोरोना वायरस
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