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महिलाओं को मार्गदर्शन देने की औकात पुरुषों में नहीं: RSS चीफ मोहन भागवत

By भाषा | Updated: September 25, 2019 06:12 IST

संघ प्रमुख ने कहा कि महिलाएं अपनी स्थिति को समझें और बाहर आएं। उन्होंने कहा कि आज जो रिपोर्ट आई है, उसमें यह कहा गया है कि लोग महिलाओं की बात तो सुनते हैं लेकिन निर्णय करने में कितना अमल करते हैं, यह स्पष्ट नहीं है।

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ठळक मुद्देरिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ी है लेकिन हाई स्कूल स्तर पर स्कूल बीच में छोड़ने के मामले सबसे अधिक पाये गए हैं।संगठन ने देश भर में 74,095 लोगों से साक्षात्कार के आधार पर यह रिपोर्ट करीब ढाई साल के सर्वेक्षण में तैयार की है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि महिलाओं के विकास एवं उत्थान का रास्ता तय करने या उनको मार्गदर्शन देने की ‘औकात’ पुरूषों में नहीं हो सकती और पुरुषों को इस ‘अहंकार’ से बाहर निकलना चाहिए कि वे महिलाओं के लिये कुछ कर रहे हैं। दृष्टि स्त्री अध्ययन प्रबोधन केंद्र द्वारा तैयार ‘‘भारत में महिलाओं की स्थिति’ विषय पर रिपोर्ट जारी करते हुए भागवत ने कहा कि महिलाओं में सृजन, पालन और विध्वंस की ताकत है। जीवन का कारोबार चलना है तब महिला और पुरूष के माध्यम से चलना है। धर्म कार्य के लिये भी गृहस्थ ही चाहिए। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक ने कहा कि महिलाओं को पहुंच, अवसर प्रदान करने तथा उन अवसरों को उपयोग करने का प्रबोधन दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘महिलाओं के उत्थान के लिये पुरुष वर्ग का बहुत प्रबोधन किये जाने की जरूरत है। महिलाओं के लिये कुछ कर रहे हैं, ऐसा अहंकार पुरुषों को नहीं करना चाहिए।’’ 

भागवत ने कहा कि महिलाओं के विकास और उत्थान का रास्ता तय करने वाला पुरुष नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद से एक बार पूछा गया था कि महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे? उन्होंने कहा था कि उनको (महिलाओं) संदेश देने की औकात पुरुषों की नहीं है। 

संघ प्रमुख ने कहा कि महिलाएं अपनी स्थिति को समझें और बाहर आएं। उन्होंने कहा कि आज जो रिपोर्ट आई है, उसमें यह कहा गया है कि लोग महिलाओं की बात तो सुनते हैं लेकिन निर्णय करने में कितना अमल करते हैं, यह स्पष्ट नहीं है। भागवत ने कहा कि इसका कारण यह है कि हम उनकी (महिलाओं) शक्ति को भूल गए हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘घर अगर अच्छे से चलता है तो इसमें महिलाओं का योगदान है। पुरुषों को प्रकृति ने संभालने (घर) का गुण नहीं दिया है। महिलाओं का विकास केवल महिलाएं ही कर सकती हैं।’’ संघ प्रमुख ने कहा कि वह पुरुष वर्ग का आह्वान करते हैं कि आज जो रिपोर्ट जारी हुई है, उसे पढ़ें और अपने घर से इस दिशा में कार्य आरंभ करें। महिलाओं का व्यक्तित्व बहुआयामी होता है, एक साथ कई कार्य कर सकती हैं.. इसलिये पुरुष भय नहीं करें। 

भागवत ने बताया कि मंगलवार को विदेशी मीडिया से संवाद के दौरान उनसे संघ के कार्यो में महिलाओं की सहभागिता के बारे में पूछा गया था। उन्होंने प्रश्नकर्ता को बताया कि इसे बताने में काफी समय लग जायेगा और उनके कार्यो के बारे में एक किताब लिखी जा सकती है तथा वह इसे देखना चाहते हैं तब संध्या में इस कार्यक्रम में आएं। 

दृष्टि स्त्री अध्ययन प्रबोधन केंद्र द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 79 प्रतिशत महिलाएं अपने प्रति शुद्ध रूप से विश्वास रखती हैं और आशावादी हैं। इसमें इस बात का उल्लेख किया गया है कि संसद के दोनों सदनों की विभाग संबंधी 24 स्थायी समितियों में किसी समिति की अध्यक्षता महिला नहीं कर रही हैं। इसमें कहा गया है कि 79.14 प्रतिशत महिलाओं के पास बैंक खाता है, 90.62 प्रतिशत महिलाओं के पास आधार कार्ड, 84.04 प्रतिशताओं के पास वोटर कार्ड है जबकि 35 प्रतिशत महिलाओं के पास पैन कार्ड हैं। बड़ी संख्या में महिलाओं को गठिया की परेशानी है जबकि काफी संख्या में महिलाएं को रक्त की कमी की समस्या है। 

रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ी है लेकिन हाई स्कूल स्तर पर स्कूल बीच में छोड़ने के मामले सबसे अधिक पाये गए हैं। संगठन ने देश भर में 74,095 लोगों से साक्षात्कार के आधार पर यह रिपोर्ट करीब ढाई साल के सर्वेक्षण में तैयार की है। इसे परियोजना निदेशक मनीषा कोटेकर के नेतृत्व में 26 खंडों में तैयार किया गया है।

टॅग्स :मोहन भागवतआरएसएस
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