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NCP सहित अन्य विपक्षी दल कांग्रेस की बैठक से क्यों रहे नदारद

By शीलेष शर्मा | Updated: November 6, 2019 04:24 IST

लोकमत की छानबीन में यह बात उभर कर सामने आई कि राकांपा नेता शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल दिल्ली में होते हुए इस कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले सके क्योंकि वे महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम में व्यस्त थे.

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ठळक मुद्देमोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और बेरोजगारी के खिलाफ विपक्ष के ‘हल्ला बोल’ को अभी तक सपा, बसपा, जैसे राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त नहीं हो सका है. इन दलों की गैर मौजूदगी जिसमें सपा, बसपा के अलावा राकांपा और टीडीपी भी शामिल है को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगना शुरू हो गई.

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और बेरोजगारी के खिलाफ विपक्ष के ‘हल्ला बोल’ को अभी तक सपा, बसपा, जैसे राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त नहीं हो सका है. उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार यह दोनों दल कुछ अन्य दलों के साथ-साथ कांग्रेस द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेने के लिए नहीं पहुंचे.

इन दलों की गैर मौजूदगी जिसमें सपा, बसपा के अलावा राकांपा और टीडीपी भी शामिल है को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगना शुरू हो गई. इन अटकलों का बड़ा कारण गुलाम नबी आजाद की वह टिप्पणी थी जिसमें उन्होंने कहा कि जो दल बैठक में मौजूद नहीं हो सके उसका कारण उन दलों से पूछा जाना चाहिए.

लोकमत की छानबीन में यह बात उभर कर सामने आई कि राकांपा नेता शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल दिल्ली में होते हुए इस कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले सके क्योंकि वे महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम में व्यस्त थे.

बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ नेता ने लोकमत को बताया कि विपक्षी दलों की जब बैठक शुरू हुई तो 15 मिनट तक शरद पवार के आने की प्रतीक्षा की गई.  बैठक की कार्यवाही तब शुरू  की गई जब गुलाम नबी आजाद को शरद पवार का यह संदेश मिला कि वे महाराष्ट्र की घटनाओं मे व्यस्त होने के कारण बैठक में नहीं पहुनच पा रहे है. सपा और बसपा ने पहले ही अहमद पटेल को यह जानकारी दे दी थी कि वे बैठक में मौजूद नहीं रहेगें.

हालांकि सपा के नेता रामगोपाल और बसपा नेता सतीश मिश्रा अहमद पटेल के संपर्क में थे. लेकिन जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में बसपा के सफाए तथा राजस्थान में बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से मायावती कांग्रेस से नाराज़ है इसी नाराजगी के कारण उन्होंने कांग्रेस के साथ मंच साझा करने से इंकार करने का फैसला किया. बसपा की ओर से जो दलील दी गयी उसमें साफ किया गया कि बसपा प्रमुख मायावती संगठन को नयी सिरे से खड़ा करने में व्यस्त है इसलिए उनकी पार्टी की भागीदारी इस बैठक में संभव नहीं है.

सपा पहले से ही कांग्रेस से दूरी बनाये हुए है और वह पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश की राजनीति पर केंद्रित कर रही है. तेलुगू देशम के नेता दिल्ली ना पहुंच पाने के कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले सके. प्राप्त सूचना के अनुसार संसद के शीत कॉलीन सत्र के दौरान होने वाली विपक्ष की बैठक में टीडीपी हिस्सा लेगी.

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