कौन हैं शिवेश राम?, भाजपा ने राज्यसभा प्रत्याशी बनाया, जीतेंगे निर्विरोध?
By एस पी सिन्हा | Updated: March 3, 2026 16:12 IST2026-03-03T16:10:58+5:302026-03-03T16:12:17+5:30
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बिहार भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वे लंबे समय से संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय रहे हैं।

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पटनाः बिहार से राज्यसभा के 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा के द्वारा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. मुनिलाल राम के बेटे शिवेश राम को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। नितिन नबीन को राज्यसभा भेजने का निर्णय पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती साख और उनके द्वारा किए गए सांगठनिक कार्यों का प्रतिफल माना जा रहा है। पार्टी ने इन दो नामों के जरिए बिहार के राजनीतिक और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। शिवेश कुमार की उम्मीदवारी को पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देने के रूप में देखा जा रहा है।
इन दोनों चेहरों के मैदान में आने से बिहार की राज्यसभा सीटों पर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। हालांकि कयास यह लगाया जा रहा था कि भाजपा भोजपुरी फिल्म के पावरस्टार पवन सिंह को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सारे कयासों पर अब विराम लग गया है। गायक गुंजन सिंह ने पिछले दिनों कहा था कि भाजपा पवन सिंह को राज्यसभा भेजेगी।
गुंजन सिंह का अनुमान भी फेल हो गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बिहार भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वे लंबे समय से संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय रहे हैं। पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें राज्यसभा भेजे जाने का फैसला अहम माना जा रहा है।
सियासत के जानकारों का मानना है कि नितिन नबीन को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक संतुलन दोनों को साधने की कोशिश की है। नितिन नबीन का नाम पहले से ही संभावित उम्मीदवारों की सूची में चर्चा में था। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले नितिन नबीन को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का अनुभव है।
ऐसे में राज्यसभा में उनकी मौजूदगी भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा के महामंत्री और सासाराम से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके शिवेश राम भी राज्यसभा के उम्मीदवार बनाए गए हैं। शिवेश राम भी भाजपा के सक्रिय और जमीनी नेता माने जाते हैं। सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उन्हें मौका दिया है।
माना जा रहा है कि उनके नाम से पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने का संदेश दिया है। भाजपा के इस फैसले को बिहार में आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्यसभा की सीटों पर कब्जा मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी ने संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों पर फोकस किया है।
बता दें कि राज्यसभा की सीटों को लेकर बिहार में पहले से ही कयासों का दौर जारी था। अब भाजपा की आधिकारिक घोषणा के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। फिलहाल दोनों नेताओं के समर्थकों में उत्साह का माहौल है। आने वाले दिनों में नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्यसभा चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
भाजपा की इस घोषणा के बाद अब सबकी नजरें विपक्षी दलों, विशेषकर राजद और कांग्रेस की अगली सूची पर टिकी हैं। नितिन नबीन जैसे सक्रिय नेता के राज्यसभा जाने से बिहार सरकार और संगठन में भी फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है।