कौन हैं अधिकारी निलेश रामचंद्र देवरे?, राजद विधायक राहुल कुमार शर्मा ने लगाए आरोप तो बचाव में उतरे ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी?
By एस पी सिन्हा | Updated: February 18, 2026 16:25 IST2026-02-18T16:24:15+5:302026-02-18T16:25:15+5:30
अशोक चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं, उनकी अपनी पृष्ठभूमि की जांच होनी चाहिए।

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पटनाः बिहार में मामूली घटना पर भी मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया में भी ऐसा तूफान खड़ा किया जाता है मानो बिहार सबसे बुरी जगह है। राज्य में होने वाली किसी भी घटना को लेकर ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो ऐसी घटना कहीं और होती ना हो। इसी कड़ी में राज्य की राजनीति में बिहार कैडर के 2011 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी निलेश रामचंद्र देवरे की चार्टर प्लेन यात्रा को लेकर काफी हंगामा मचा हुआ है। यह मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। नीलेश रामचंद्र देवरे महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले हैं। वह वर्तमान में बिहार पर्यटन विभाग के सचिव हैं, साथ ही नागरिक उड्डयन से संबंधित जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं। अतिरिक्त प्रभार में वे बिहार चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भी हैं।
ऐसे में निलेश रामचंद्र देवरे की चार्टर विमान यात्रा को लेकर बिहार विधानसभा में जोरदार बहस छिड़ गई है। दरअसल, राजद विधायक राहुल कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि नीलेश देवरे अपने परिवार के साथ दिल्ली से पटना तक एक लग्जरी चार्टर विमान से लौटे थे। उन्होंने कहा कि इस उड़ान का एकतरफा खर्च करीब 18 से 25 लाख रुपये या उससे अधिक है।
जबकि यही सफर कमर्शियल फ्लाइट से काफी सस्ता हो सकता था। राहुल कुमार ने बिहार विधानसभा में उठाते हुए सरकार से पूछा कि इतनी महंगी यात्रा की मंजूरी किसने दी, खर्च किसने उठाया और क्या यह नियमों के खिलाफ नहीं है? विपक्ष इसे विशेष सुविधा और संभावित अनियमितता से जोड़ रहा है। जवाब में ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यह मामला नया नहीं, बल्कि पिछले साल जुलाई का है।
उन्होंने बताया कि उस समय वे स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उसी चार्टर विमान में थे। यात्रा में एक सरकारी कार्यक्रम और एक निजी कार्यक्रम शामिल था। अशोक चौधरी ने कहा कि वापसी में विमान खाली लौट रहा था, इसलिए किसी अधिकारी का उसमें बैठना गलत नहीं माना जा सकता।
उन्होंने इसे सामाजिक कोण से भी जोड़ते हुए पूछा कि क्या दलित या पिछड़े वर्ग के लोगों को हवाई जहाज में सफर करने का हक नहीं? अशोक चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं, उनकी अपनी पृष्ठभूमि की जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जब देवरे स्वास्थ्य विभाग में थे, तो उन्होंने सप्लाई से जुड़े कुछ लोगों (करीब 15-25) पर सख्त कार्रवाई की थी।
जो कथित तौर पर राजद से जुड़े थे। इसी वजह से अब उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अशोक चौधरी ने निलेश देवरे के बांका, बेतिया और मधुबनी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में 25 दवाई सप्लायरों को ब्लैकलिस्ट किया है, इसलिए उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
बता दें कि राहुल शर्मा के पिता पूर्व सांसद जगदीश शर्मा बिहार के चर्चित चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता हैं। वर्तमान में वह जमानत पर बाहर हैं। वहीं, इस मुद्दे पर निर्दलीय विधायक आईपी गुप्ता ने भी निलेश देवरे का बचाव करते हुए कहा कि सरकारी चार्टर्ड विमान में यात्रा किए जाने को लेकर अनावश्यक ही बवाल खडा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी डीएम की इतनी हैसियत नहीं होती कि वो चार्टर्ड विमान से यात्रा कर सके। लेकिन किसी विभाग के प्रमुख की हैसियत से मुख्यमंत्री के साथ यात्रा करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुहिम छेड़ना सरासर गलत है। नीलेश रामचंद्र देवरे मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक के हैं और एक शिक्षित मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं।
उन्होंने पहले मेडिकल की पढ़ाई की, लेकिन बाद में सिविल सेवा चुनी। बिहार में वे, बांका, बेतिया, मधुबनी और छपरा जैसे जिलों में डीएम रह चुके हैं। केंद्र में उन्होंने केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के पीएस के रूप में काम किया था। उल्लेखनीय है कि बांका से जब उनका स्थानांतरण बेतिया के डीएम के रूप में हुआ था तो उन्होंने जिले की सारी सुविधा वहीं वापस करते हुए ट्रेन के माध्यम से बेतिया जाने का निर्णय लिया है।
देवरे जिस ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, उस ट्रेन पर जमुई के पास नक्सलियों ने हमला भी कर दिया था। यह महज संयोग रहा कि वह बाल-बाल बच गए थे। निलेश रामचंद्र देवरे वही आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने यूट्यूबर मनीष कश्यप को पहली बार गिरफ्तार करवाया था। घटना 2019 की है जब मनीष कश्यप ने किंग एडवर्ड VII की मूर्ति को तोड़ दिया था।
पुलिस ने 22 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया। लेकिन निलेश देवरे ने मनीष कश्यप और दो अन्य लोगों को नामजद करके प्राथमिकी लिखवाया था। बता दें कि इन्हीं परिस्थितियों को लेकर महाराष्ट्र निवासी भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी ने कुछ साल पहले बेबाकी से कहा था कि बिहार को बदनाम करना फैशन हो गया है।
बेतिया डीएम रहने से पूर्व बांका के डीएम, गया के नगर आयुक्त और पटना जिला के बाढ़ अनुमंडल के अनुमंडल पदाधिकारी रह चुके हैं। एक कड़क और ईमानदार अफसर के तौर पर चर्चित रहे निलेश देवरे ने अपनी पदस्थापना वाली जगहों पर काफी सुर्खियां बटोरी है। नासिक के रहने वाले निलेश देवरे बिहार को लेकर न सिर्फ काफी संजीदा रहते हैं बल्कि बिहार को जीते भी हैं।
बेतिया का डीएम रहते हुए निलेश देवरे ने ट्विटर पर बेबाकी से लिखा था कि बिहार को बदनाम करना एक तरह से फैशनेबल हो चुका है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह यहां भी आपराधिक घटनाएं या घोटाले जैसी घटनाएं होती हैं, लेकिन उन घटनाओं की यहां अतिरंजना होती है। निलेश देवरे ने स्पष्ट कर दिया है कि यहां की व्यवस्था, मीडिया और लोगों की मानसिकता इस परिस्थिति के लिए जिम्मेवार है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी मानसिकता के कारण ही बिहार की छवि खराब हुई है। निलेश देवरे कई सालों से बिहार में पदस्थापित हैं और बिहार को लेकर एक बात हमेशा कहा करते थे कि लोग भी अच्छे हैं, जगह भी काफी अच्छी है। लेकिन माहौल ऐसा बना दिया गया है कि मानो बिहार कोई विचित्र जगह हो।
निलेश देवरे को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि बिहार को लेकर उनके मन में शुरू से ही अच्छी भावना रही थी। पटना जिला के बाढ़ अनुमंडल में पदस्थापना के दौरान कई लोगों ने जय बिहार के नारे के साथ संबोधन समाप्त करते उनको देखा था। निलेश जब कभी भी किसी सरकारी या गैर सरकारी समारोह में हिस्सा लेते थे।
उन्हें संबोधन का मौका मिलता था तो जय बिहार के नारे के साथ ही उन का संबोधन समाप्त होता था। 2014 लोकसभा चुनाव से पूर्व मोकामा के मरांची गांव में एक सरकारी समारोह हुआ था। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेता और नौकरशाह मौजूद थे। बतौर बाढ़ अनुमंडलाधिकारी उन्हें स्वागत भाषण की जिम्मेवारी सौंपी गई थी।
स्वागत भाषण के बाद उन्होंने अपने संबोधन का अंत जय हिंद और जय बिहार के नारे के साथ किया था तो मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए थे। एक मराठी भाषी अधिकारी का जय बिहार के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त करना न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि मंच पर मौजूद विशिष्ट लोगों को भी काफी अच्छा लगा था।
राजद के द्वारा उनके खिलाफ मुहिम छेडे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ पत्रकार महेश सिन्हा ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी को बदनाम किया जा रहा है। निलेश देवरे के अपने परिवार के साथ निजी विमान में पटना आने पर हल्ला मचा हुआ है।
लेकिन अभी एक साल पहले जब दो आईएएस अधिकारी रिशुश्री नाम के एक दलाल के 21 लाख 92 हज़ार रुपए के विदेशी भ्रमण पैकेज (विएना, सल्ज़बर्ग, वुल्फ़गर्ग) पर घूम कर आए थे, उसे सब इतना जल्दी क्यूं भूल गए? इसके साथ ही दो अधिकारी योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा को भी लोग भूल गए।
उस समय तो इन दोनो अधिकारियों को विदेश घुमाने वाले दलाल के ऊपर ईडी का छापा भी पड़ा था। आज कल योगेश कुमार सागर सामाजिक कल्याण मंत्रालय में हैं और अभिलाषा शर्मा बिहार में जीविका के सीईओ हैं। इस दलाल रिशुश्री पर अभिलाषा शर्मा के घर पर 9 लाख का एक बगीचा भी बनवाय होने का भी आरोप लगा था।