पटनाःबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद सूबे में सत्ता हस्तांतरण की चल रही तैयारियों के बीच बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह एक पहेली बना हुआ है। एनडीए में मुख्यमंत्री के नए चेहरे की तलाश तेज है। इस रेस में भाजपा के नेता एवं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। हालांकि इस रेस में उनके अलावे कई नामों की चर्चा हो रही है। इस बीच भाजपा के प्रदेश कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के समर्थन में पोस्टर लगा दिया गया, जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही उसे फाड़कर हटा दिया।
इस पोस्टर में न सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन की बात कही गई है, बल्कि ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने की भी मांग उठाई गई थी। पोस्टर लगने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया था। पोस्टर में लिखा था कि ‘बाल्मिकी समाज संघ की यही पुकार बिहार में हो सम्राट की सरकार। नीचे लिखा गया कि भाजपा को हमने दिया है हर संभव साथ, ठेकेदारी प्रथा आपकी सरकार में हो समाप्त’।
इस पोस्टर की खबर मीडिया में आने के बाद हड़कंप मच गया और आनन फानन में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर को फाड़कर हटा दिया। पोस्टर पर भाजपा की तरफ से जवाब आया कि यह पोस्टर भाजपा की तरफ से नहीं लगाया गया था। भाजपा के मीडिया प्रमुख दानिश इकबाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पोस्टर किसने लगाया और किसने हटाया, इसकी जानकारी नहीं है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस पोस्टर से भाजपा का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का कोई कार्यकर्ता इस तरह का पोस्टर नहीं लगाता और न ही पार्टी की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक मांग की गई है। पोस्टर फाड़ने की वजह पूछे जाने पर दानिश इकबाल ने बताया कि इतनी बड़ी लोगों की संख्या हैं।
कौन पोस्टर लगा रहा या फाड़ रहा, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। आखिर में उन्होंने यह क्लियर कहा कि भाजपा की ओर से या फिर पार्टी के कोई भी कार्यकर्ता इसमें इन्वॉल्व नहीं हैं। दूसरी तरफ पहले पोस्टर लगने और उसके बाद फाड़ दिए जाने पर सियासी पारा चढ़ गया है। बहरहाल, पोस्टर लगाने का उद्देश्य क्या था यह तो पोस्टर लगाने वाला और बीजेपी जाने लेकिन पोस्टर लगाने और बाद में उसे फाड़कर हटाने के बाद सियासत में तरह तरह के कयास जरूर लगाए जा रहे हैं।