पश्चिम बंगाल चुनावः 4660 अतिरिक्त मतदान केंद्र?, कुल संख्या 85379 और 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में पड़ेंगे वोट
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 4, 2026 12:29 IST2026-04-04T12:24:29+5:302026-04-04T12:29:53+5:30
West Bengal Elections: निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा, "ये निर्णय पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं की सुविधा में इजाफा करने के उद्देश्य से लिए गए हैं।"

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कोलकाताः निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में 4,660 अतिरिक्त मतदान केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि ये अतिरिक्त मतदान केंद्र उन बूथों के साथ स्थापित किए जाएंगे, जहां मतदाताओं की संख्या 1,200 से अधिक है। इसके साथ ही राज्य में मतदान केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 85,379 हो गई है।
To further facilitate Voter convenience in the forthcoming Assembly Elections in West Bengal, the Election Commission of India has approved the creation of 4660 auxiliary polling stations where the number of voters exceeded 1200
— ANI (@ANI) April 4, 2026
ECI has also approved the shifting of 321 polling… pic.twitter.com/fh1QrLl4XF
उन्होंने बताया कि आयोग ने 321 मतदान केंद्रों के स्थानांतरण को भी मंजूरी दे दी है। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा, "ये निर्णय पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं की सुविधा में इजाफा करने के उद्देश्य से लिए गए हैं।" तीन अप्रैल को लिखे एक पत्र में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को सूचित किया कि उसने इस संबंध में 28 मार्च को प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
आयोग ने कहा कि अतिरिक्त मतदान केंद्रों की स्थापना उसके मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही की जानी चाहिए। साथ ही, आयोग ने मतदान केंद्रों के स्थानांतरण के संबंध में मतदाताओं को समुचित जानकारी देने पर जोर दिया।
पत्र में कहा गया है, "यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित स्थान पर स्थित उस मतदान केंद्र के सभी मतदाताओं को संबंधित अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से सूचित किया जाए।" पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि मतगणना चार मई को होगी।
तृणमूल ने महिला आरक्षण कानून के मसौदे के अभाव पर सवाल उठाए
संसद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने के प्रावधान वाले विधेयकों को पारित करने के लिए फिर से बैठक करने वाली है, ताकि महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू किया जा सके। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओब्रायन ने प्रस्तावित कानून के मसौदे के अभाव पर सवाल उठाए हैं। संसदीय प्रक्रियाओं के पालन को लेकर चिंता जताते हुए सरकार की आलोचना की।