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West Bengal Election: कौन हैं शुभेंदु अधिकारी? क्यों इनसे डरी हुई है ममता सरकार

By गुणातीत ओझा | Updated: November 19, 2020 20:09 IST

ममता बनर्जी के खास और मजबूत टीएमसी नेता शुभेंदु अधिकारी अपनी ही सरकार से खुश नजर नहीं आ रहे। गौर करने वाली बात यह है कि अगर शुभेंदु बागी हुए तो पश्चिम बंगाल में ममता को फिर से सत्ता हासिल करने में मुश्किल हो सकती है।

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ठळक मुद्देशुभेंदु पश्चिम बंगाल सरकार में परिवहन मंत्री हैं।इन दिनों उनके बागी तेवर ने ममता बनर्जी को एक नई टेंशन दे दी है।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर राज्य में सियासत अभी से गरम है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव पिछले चुनाव की तरह नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वहीं, ममता बनर्जी के खास और मजबूत टीएमसी नेता शुभेंदु अधिकारी अपनी ही सरकार से खुश नजर नहीं आ रहे। गौर करने वाली बात यह है कि अगर शुभेंदु बागी हुए तो पश्चिम बंगाल में ममता को फिर से सत्ता हासिल करने में मुश्किल हो सकती है। शुभेंदु पश्चिम बंगाल सरकार में परिवहन मंत्री हैं। लेकिन इन दिनों उनके बागी तेवर ने ममता बनर्जी को एक नई टेंशन दे दी है। शुभेंदु की मजबूती का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि वह 20 विधानसभा सीटों पर सीधी दखल रखते हैं। शुभेंदु अधिकारी की टीएमसी से नाराजगी भाजपा के लिए स्वर्णिम सियासी अवसर हो सकता है। बातें तो यहां तक चल रही हैं कि शुभेंदु आने वाले दिनों भाजपा के ही हो जाएंगे। भविष्य में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं लेकिन वर्तमान में शुभेंदु टीएमसी नेता हैं और उन्होंने अभी तक अपना सियासी पत्ता नहीं खोला है। 

अब आप सोच रहे होंगे ये शुभेंदु अधिकारी आखिर हैं कौन? आइये आपको बताते हैं उनके बारे में.. दो बार सांसद रह चुके शुभेंदु अधिकारी का परिवार राजनीतिक तौर पर काफी मजबूत है। पूर्वी मिदनापुर को कभी वामपंथ का गढ़ माना जाता था मगर शुभेंदु ने अपनी रणनीतिक कौशल से बीते कुछ समय में इसे टीएमसी का किला बना दिया है। शुभेंदु अधिकारी के भाई दिब्येंदु तमलुक से लोकसभा सदस्य हैं, जबकि तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे सौमेंदु कांथी नगर पालिका के अध्यक्ष हैं। उनके पिता सिसिर अधिकारी टीएमसी के सबसे वरिष्ठ लोकसभा सदस्य हैं, जो कांथी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

नंदीग्राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाकर शुभेंदु 2019 में तमलुक सीट से लोकसभा चुनाव जीते। बंगाल विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद उन्हें ममता कैबिनेट में परिवहन मंत्रालय का भार सौंपा गया। पूर्वी मेदनीपुर, मुर्शिदाबाद और मालदा में उन्होंने कांग्रेस को कमजोर करने और टीएमसी को मजबूत करने के लिए जीतोड़ मेहनत की है। क्योंकि वह ग्रासरूट लेवल के नेता हैं, इसलिए बीते कुछ समय में उनकी स्वीकार्यता भी काफी बढ़ी है। उन्हें मेदिनीपुर, झारग्राम, पुरुलिया, बांकुरा और बीरभूम जिलों में टीएमसी के आधार का विस्तार करने का भी श्रेय दिया जाता है। इस तरह से राजनीतिक पंडितों का मानना है कि शुभेंदु अगर टीएमसी से अलग होते हैं तो इसका असर करीब 20 सीटों पर दिख सकता है। यानी शुभेंदु बंगाल में ममता की करीब 20 सीटें खराब करने की क्षमता रखते हैं। 

आपके मन में यह सवाल भी कौंध रहा होगा कि ऐसा क्य हुआ जिससे शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी से बगावत कर बैठे। राजनीतिक पंडितों की मानें तो शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी से नाराज चल रहे हैं। इसके अलावा पश्चिंम बंगाल प्रशांत किशोर की एंट्री भी उन्हें साल रही है। प्रशांत किशोर ने बंगाल में संगठनात्मक बदलाव किया है, जिससे शुभेंदु खुश नहीं हैं। शुभेंदु अधिकारी चाहते हैं कि पार्टी 65 विधानसभा सीटों पर उनकी पसंद के उम्मीदवारों को को मौका दे। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की धाकड़ परफॉर्मेंस से टीएमसी अभी उबर नहीं पाई है और आगामी विधानसभा चुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी दी है। चर्चाएं आम हैं कि ममता बनर्जी ने भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के कहने पर ही प्रशांत किशोर से हाथ मिलाया है। इन्हीं बदलावों के चलते शुभेंदु अधिकारी नाखुश बताए जा रहे हैं। शुभेंदु को ऐसा लग रहा है कि उनकी पार्टी में अब उपेक्षा हो रही है।

टॅग्स :वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनावटीएमसीममता बनर्जी
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