West Bengal Election 2026: किंगमेकर की भूमिका में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, 50-60 सीटों पर सीधा असर
By एस पी सिन्हा | Updated: March 29, 2026 14:43 IST2026-03-29T14:43:04+5:302026-03-29T14:43:09+5:30
West Bengal Election 2026: उन्होंने बिहारी नेता शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को आगे बढ़ाया है। टिकट दे कर दोनों को टीएमसी से सांसद बनाया है।

West Bengal Election 2026: किंगमेकर की भूमिका में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, 50-60 सीटों पर सीधा असर
West Bengal Election 2026: पश्विम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी) और विपक्षी भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी है। इस बार दोनों पार्टियों की नजर पश्चिम बंगाल में रह रहे बिहारी मतदाताओं पर भी है। बंगाल में बिहार, यूपी, झारखंड आदि हिंदी भाषी राज्यों से आकर बसे लोगों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में हिन्दुस्तानी (मतलब बाहरी) 50 से 60 सीटों पर हार-जीत तय करने की भूमिका में हैं। जबकि 15-20 सीटों पर किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं।
हिंदी भाषियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में औद्योगिक और बॉर्डर के पास के इलाके हैं। साल 2011 की जनगणना के अनुसार बंगाल में 63 लाख से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं। यहां 12 लाख लोग बिहार से हैं। कोलकाता में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी हैं।
इसके अलावा हावड़ा, हुगली एवं उत्तर 24 परगना में भी इनकी आबादी अच्छी है। बिहार के लोग यहां के जूट मिल व दूसरी कारखाने में काम करने आए और बस गए। उत्तर बंगाल में बिहार के किशनगंज, कटिहार, अररिया जिले के काफी लोग व्यापार करते हैं। उत्तर बंगाल, दक्षिण बंगाल व पश्चिम बंगाल में बंगाल को बांट कर देखें तो उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कूचबिहार, मालदा हैं।
दक्षिण में आसनसोल, दुर्गापुर, रानीपुर जैसे कोयलांचल है, जो धनबाद के पास है। पश्चिम में मेदिनीपुर, खड़गपुर, कोलकाता व उत्तर 24 परगना के इलाके हैं। इनमें हिंदी भाषी जीत और हार में अहम भूमिका निभाते हैं। बता दें कि पश्चिम वर्धमान के आसनसोल से सांसद हैं। यह इलाका झारखंड की सीमा से सटा है। यहां की 50 फीसदी आबादी हिंदी भाषी हैं। ये लोग मूल रूप से बिहार-झारखंड के हैं।
आसनसोल लोकसभा में 7 विधानसभा सीटें पांडबेश्वर, रानीगंज, जमुरिया, आसनसोल दक्षिण, आसनसोल उत्तर, कुल्टी, बाराबनी हैं। आसनसोल, कोलकाता के बाद दूसरा सबसे बड़ा व घनी आबादी वाला इलाका है। यह कोयला खदानों, रेलवे जंक्शन और लोहा-इस्पात केंद्रित उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहां भी हिन्दुस्तानियों की संख्या काफी है।
सूत्रों की मानें तो भाजपा ने कोलकाता, आसनसोल, वर्धमान आदि हिंदी भाषी क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के लिए बिहार के विधायक, मंत्री समेत 150 नेताओं को तैनात किया है। इनके साथ चुनाव अभियान की कमान बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय संभाल रहे हैं।
उनके साथ 12 विधायक, 12 से अधिक प्रदेश संगठन के नेता और युवा मोर्चा के 50 पदाधिकारी और मंडल अध्यक्ष हैं। ये हिंदी भाषी लोगों को पार्टी से जोड़ रहे हैं। वहीं, चुनाव प्रचार में प्रमुख चेहरों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और बंगाल भाजपा के प्रभारी मंगल पांडेय हैं। ऐसे में 294 सीटों वाले इस राज्य में भाजपा की जीत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए बड़ी चुनौती है। इसके अलावे पश्चिम बंगाल की सियासत में अहम भूमिका निभाने वालों में संतोष पाठक भी हैं, जो मूलरूप से बक्सर के रहने वाले हैं। संतोष पाठक पहले कांग्रेस में थे। अब भाजपा में हैं और चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं, उत्तर 24 परगना में बेहद सक्रिय अर्जुन सिंह आरा के निवासी हैं। बंगाल के बैरखपुर क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनकी राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत कांग्रेस से हुई है। फिर टीएमसी में आए। 2014 से भाजपा में हैं। एक बार सांसद चुने गए। इस बार भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इसी तरह सारण के रहने वाले गोपाल सिंह उत्तर 24 परगना से कांग्रेस विधायक चुने जाते थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे राजेश सिंह टीएमसी से राजनीति कर रहे हैं और कोलकाता से काउंसलर हैं। जबकि रितेश तिवारी भाजपा के नेता हैं और चुनाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन कायस्थ हैं। बंगाल में कायस्थ जाति 3 फीसदी से ज्यादा हैं। इस जाति के लोग हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं। पश्चिम बंगाल में 37 साल कायस्थ मुख्यमंत्री (कांग्रेस से विधानचंद्र राय 14 साल और सीपीएम से ज्योति बसु 23 साल) रह चुके हैं। वहीं, मंगल पांडेय भाजपा के बंगाल प्रभारी हैं। ये ब्राह्मण जाति से हैं। इनकी कोशिश बंगाल के सवर्ण वोट बैंक को भाजपा की ओर लाने के साथ हिंदी भाषी लोगों को भाजपा का वोटर बनाने की है।
दूसरी तरफ टीएमसी प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन इलाकों में बिहार के नेताओं को अपनी पार्टी से सांसद बनाकर बिहारी अस्मिता का कार्ड चल दिया है। बंगाल में विधानसभा चुनाव की लड़ाई है, लेकिन मुकाबला बिहार बनाम बिहार का हो गया है। भाजपा और टीएमसी बिहार के लोगों और हिंदी भाषियों को लुभाने की तमाम कोशिशें कर रही हैं। शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद समेत बिहार के कई और नेता बंगाल की राजनीति में धाक रखते हैं।
विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से हिंदी भाषी लोगों को लुभाने की कोशिश को देखते हुए ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने बिहारी नेता शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को आगे बढ़ाया है। टिकट दे कर दोनों को टीएमसी से सांसद बनाया है।
अब इन पर बिहारियों के वोट टीएमसी की तरफ लाने की जिम्मेदारी है। शत्रुघ्न सिन्हा भी कायस्थ जाति से हैं। जबकि ब्राह्मण जाति से आने वाले कीर्ति आजाद वर्धमान-दुर्गापुर से सांसद हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में 7 विधानसभा क्षेत्र-दुर्गापुर पश्चिम, दुर्गापुर पूर्वी, गलसी, वर्धमान उत्तर, वर्धमान दक्षिण, मंतेश्वर भातार और मानगोविंद हैं। कीर्ति आजाद दरभंगा से भाजपा के सांसद रहे हैं। वे कांग्रेस में भी रह चुके हैं।