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पश्चिम बंगाल: रथयात्रा की अनुमति के लिए SC पहुंची BJP, कलकत्ता हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक

By भाषा | Updated: December 24, 2018 15:10 IST

भाजपा ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत ये रथ यात्रायें आयोजित करना चाहती है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा इस रथ यात्रा के माध्यम से पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में पहुंचने का प्रयास कर रही है।

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पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा के आयोजन की अनुमति के लिये भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने रथ यात्रा की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

भाजपा ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया है। पार्टी ने राज्य के तीन जिलों में रथ यात्रा आयोजित करने का कार्यक्रम बनाया था।

भाजपा ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के शुक्रवार के आदेश को चुनौती दी है जिसने रथयात्रा की अनुमति देने संबंधी एकल न्यायाधीश का आदेश निरस्त कर दिया था।

भाजपा ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत ये रथ यात्रायें आयोजित करना चाहती है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा इस रथ यात्रा के माध्यम से पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में पहुंचने का प्रयास कर रही है।

शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ न्यायालय को भाजपा की अपील मिली है। याचिका की अभी जांच की जा रही है।

भाजपा की ओर से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता महेश अग्रवाल ने बाद में बताया कि प्रयास किये जा रहे हैं कि इस पर एक दो दिन में सुनवाई हो जाये।

शीर्ष अदालत में इस समय एक जनवरी तक शीतकालीन अवकाश है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देबाशीष कारगुप्ता और न्यायमूर्ति शम्पा सरकार की पीठ ने शुक्रवार को इस मामले को राज्य की एजेन्सियों से प्राप्त खुफिया जानकारी पर विचार करने के लिये एकल न्यायाधीश के पास भेज दिया था।

खंडपीठ ने न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की एकल न्यायाधीश पीठ को इस मामले में खुफिया जानकारी के साथ नये सिरे से विचार करने और यथाशीघ्र इसका निस्तारण करने के लिये कहा है।

भाजपा के मूल कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बंगाल के कूच बिहार जिले से सात दिसंबर को इस रैली की शुरूआत करने वाले थे। इसके बाद यह रथयात्रा नौ दिसंबर को दक्षिणी 24 परगना के काकद्वीप और 14 दिसंबर को बीरभूम में तारापीठ मंदिर से शुरू होनी थी।

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