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घाटी में बदला मौसम, 'चिल्लाई खुर्द' की विदाई के साथ कश्मीरियों की बढ़ी चिंता

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 20, 2023 13:30 IST

दरअसल, कश्मीर में सर्दी के 40 दिनों में भयानक सर्दी का अनुमान लगाया जाता रहा है। यह 21 और 22 दिसम्बर की रात से शुरू होते हुए 1 मार्च तक चलता है।

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ठळक मुद्देजम्मू-कश्मीर में 'चिल्लाई खुर्द' की विदाई आज घाटी में सर्दी के मौसम को तीन भागों में बांटा गया है'चिल्लाई खुर्द' कम सर्दी के दिनों को कहा जाता है

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में भयानक सर्दी के मौसम के दूसरे भाग ‘चिल्लाई खुर्द’ की आज विदाई है अर्थात अंतिम दिन। अब कल से 'चिल्लाई बच्चा' के दस दिन आरंभ हो जाएंगे, फिर कश्मीर में सर्दी के मौसम के खत्म होने की घोषणा की जाएगी। मगर ये बुरी खबर यह है कि ‘चिल्लाई खुर्द’ की विदाई से दो दिन पहले ही मौसम जो रंग दिखा रहा है वह चिंताजनक है।

चिंता की बात तापमान में होने वाली अप्रत्याशित वृद्धि है। मौसम विभाग के अनुसार, श्रीनगर में ही तापमान सामान्य से 4.4 डिग्री अधिक है। वहीं, सर्दियों की राजधानी जम्मू में भी यही हाल है। सबसे ज्यादा चिंता की बात गुलमर्ग के पहाड़ों से आने वाली खबर है जहां तापमान समान्य से 8 डिग्री ऊपर पहुंच गया है।

हालांकि, आज हल्की बर्फबारी और बारिश की भविष्यवाणी है पर पर्यटकों के लिए चिंता यह है कि वे गुलमर्ग के कई हिस्सों से बर्फ को गायब पा रहे हैं। गुलमर्ग की ढलानों पर स्कींइग सिखाने वाले भी परेशान हैं। जिनके अनुसार, गर्म मौसम की मार बर्फ पर पड़ने के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है।

अब अगले महीने से श्रीनगर में ट्यूलिप गार्डन को खोलने की तैयारी हो रही है। पिछले साल भी इसके फूल समय से पहले मुरझा गए थे। मगर इसके प्रति इस बार परेशानी यह है कि 'चिल्लाई खुर्द' की विदाई के पहले ही तापमान के उछाले मारने के कारण फूलों के खिलने पर संदेह उत्पन्न होने लगा है।

दरअसल, कश्मीर में सर्दी के 40 दिनों में भयानक सर्दी का अनुमान लगाया जाता रहा है। यह 21 और 22 दिसम्बर की रात से शुरू होते हुए 1 मार्च तक चलता है। जिसमें पहले 20 दिनों को 'चिल्ले कलां' कहा जाता है जिसमें भयानक सर्दी पड़ती है और अगले 10 दिनों को 'चिल्लाई खुर्द'।

वहीं, अंतिम दस दिन 'चिल्लाई बच्चा' होता है जिसमें सर्दी बहुत कम ही महसूस होती है। मगर इस बार मौसम की दगाबाजी यह रही है कि भयानक सर्दी तो पहले 20 दिनों में हुई पर उतनी बर्फ नहीं गिरी जितनी चाहिए थी। इसे अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बताया जा रहा है। 

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