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इस राज्य में जनवरी से लागू हो रहा है छठा वेतन आयोग, इतनी बढ़ जायेगी सैलरी

By भाषा | Updated: September 24, 2019 06:24 IST

छठे वेतन आयोग का गठन राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन के पुनर्गठन के लिए 2016 के विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले 27 नवंबर 2015 को किया गया था। सरकार की अध्यक्षता वाले पैनल को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।

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ठळक मुद्देमुख्यमंत्री से निर्देश के बाद आवास किराया भत्ता को मौजूदा 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है।वित्त विभाग के एक सूत्र ने कहा कि वेतन पैनल की सिफारिशों के लागू होने से राजकोष पर सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ आने की संभावना है। 

पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने सोमवार को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी और कहा कि इसे अगले साल पहली जनवरी से लागू किया जाएगा। राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि कुछ मामलों में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कर्मचारियों के लिए पैनल द्वारा की गई सिफारिशों से अधिक बढ़ोतरी किये जाने को मंजूरी दी है। 

उन्होंने कहा कि नए वेतन मानों का भुगतान उसी तिथि से किया जाएगा। वित्त मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने आज वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है और यह एक जनवरी, 2020 से प्रभावी होगा।’’ 

महंगाई भत्ते (डीए) को मूल वेतन और ग्रेड वेतन में विलय कर दिया जाएगा, उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन 100 रुपये है, तो वेतन पैनल की सिफारिशों के लागू होने के बाद यह 280.90 रुपये हो जाएगा। 

एक सवाल के मुताबिक, मित्रा ने कहा कि राज्य सरकार कोई एरियर नहीं देगी। उन्होंने कहा कि ग्रेच्युटी दोगुनी होकर 6 लाख रुपये से बढ़ा कर 12 लाख रुपये की जाएगी। यह आयोग की सिफारिशों से 2 लाख रुपये अधिक है। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से निर्देश के बाद आवास किराया भत्ता को मौजूदा 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि अनुशंसित राशि 10,500 रुपये थी। राज्य के वित्त विभाग के एक सूत्र ने कहा कि वेतन पैनल की सिफारिशों के लागू होने से राजकोष पर सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ आने की संभावना है। 

छठे वेतन आयोग का गठन राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन के पुनर्गठन के लिए 2016 के विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले 27 नवंबर 2015 को किया गया था। सरकार की अध्यक्षता वाले पैनल को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। हालाँकि, बाद में इसे समय-समय पर विस्तार दिया गया। सरकार को यह रपट 13 सितंबर को मिली थी।

टॅग्स :पश्चिम बंगालवेतन आयोगममता बनर्जी
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