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चेन्नई में पानी की किल्लत: आईटी कंपनियों का आदेश, घर से काम करें कर्मचारी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 14, 2019 07:51 IST

जलसंकट से परेशानीः चेन्नई में आईटी कंपनियों ने स्टाफ से कहा- पानी नहीं है, घर से काम कीजिए.

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ठळक मुद्देओल्ड महाबलीपुरम (ओएमआर) इलाके में स्थित 12 आईटी कंपनियों ने अपने 5 हजार कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा है.अगले 100 दिनों तक पानी की कमी से कंपनियों को जूझना पड़ सकता है.

चेन्नई, 13 जूनः घर पर बैठकर दफ्तर का काम करने की तमन्ना तो बहुत से कर्मचारी रखते हैं लेकिन इसका लुत्फ चेन्नई के चंद कर्मचारी उठानेवाले हैं. यहां के ओल्ड महाबलीपुरम (ओएमआर) इलाके में स्थित 12 आईटी कंपनियों ने अपने 5 हजार कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा है. कर्मचारियों से कहा गया है कि वे अपनी सुविधा के मुताबिक कहीं से भी काम कर सकते हैं. दरअसल कार्यालयों में जलसंकट के चलते यह आदेश जारी किया गया है.

पिछली बार आईटी कंपनियों ने कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम के लिए 4 साल पहले कहा था, जब निजी टैंकर संचालकों ने हड़ताल का ऐलान किया था. ओएमआर में 600 आईटी और आईटीएएस फर्म का संचालन होता है. यहां स्थित कंपनियां पानी की खपत कम करने के लिए तमाम उपाय कर रही हैं. मिसाल के तौर पर शोलिंगनल्लूर इलाके के एलकॉट में फोर्ड बिजनेस सर्विसेज ने अपने कर्मचारियों से पीने का पानी खुद लाने को कहा है.

टेक बेस्ड जल प्रबंधन स्टार्टअप ग्रीन इन्वाइरनमेंट के सीईओ और को-फाउंडर वरुण श्रीधरन का कहना है, कंपनियां अपनी जरूरत के मुताबिक 55 प्रतिशत ट्रीटेड वॉटर का इस्तेमाल कर रही हैं और तत्काल उपयोग पर निगरानी रख रही हैं. दूसरी ओर एक आईटी कंपनी के एडमिन मैनेजर का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि ऐसे कब तक कंपनियां काम कर पाएंगी. उन्होंने कहा, हम बहुत कठिन हालात में काम कर रहे हैं.

उनका कहना है कि करीब 30 प्रतिशत संपत्ति कर पानी और सीवेज में जाता है लेकिन इसका कोई रिजल्ट नजर नहीं आता. रोजाना तीन करोड़ लीटर पानी की जरूरत गर्मियों में ओएमआर इलाके में रोजाना तीन करोड़ लीटर पानी की जरूरत होती है और इसमें से ज्यादातर पानी बाहर से मंगाया जाता है. इस पानी में से 60 प्रतिशत हिस्सा आईटी कंपनियों और दूसरे दफ्तरों में इस्तेमाल होता है.

ओएमआर की आईटी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जब अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने पानी मुहैया कराने का वादा तो किया लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. अगले 100 दिनों तक पानी की कमी से कंपनियों को जूझना पड़ सकता है. शहर में तकरीबन 200 दिनों से बारिश नहीं हुई है और अगले तीन महीनों तक जलसंकट से निपटने के लिए चेन्नई में पर्याप्त बारिश के आसार नहीं हैं.

टॅग्स :चेन्नई
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