अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष पर भारत की भूमिका क्या?, संजय राउत ने कहा- किससे डर रहे पीएम मोदी, हम आगे क्या करने जा रहे हैं?, वीडियो
By सतीश कुमार सिंह | Updated: March 23, 2026 11:19 IST2026-03-23T10:49:55+5:302026-03-23T11:19:54+5:30
सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति की रविवार को समीक्षा की और आम लोगों की खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा समेत महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया।

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मुंबईः शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि कोई बता नहीं सकता है कि भारत देश की भूमिका क्या है। यह युद्ध (US-इज़राइल बनाम ईरान संघर्ष) बहुत खतरनाक मोड़ पर आ चुका है। भारत 140 करोड़ लोगों का देश है, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस युद्ध पर अपना मत व्यक्त नहीं किया है। डर किस बात का है? उन्हें बताना चाहिए कि हमारी भूमिका क्या है और हम आगे क्या करने जा रहे हैं? पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को तब हुई, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया। इसके बाद से प्रधानमंत्री ने कई वैश्विक नेताओं से बात की है।
#WATCH | Delhi: Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, "No one can say what India's role is. This war (US-Israel versus Iran conflict) has reached a very dangerous turning point. India is a country of 1.4 billion people, but to date, Prime Minister Modi has not expressed his… pic.twitter.com/2I6epOWBmq
— ANI (@ANI) March 23, 2026
शिवसेना(UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जनता पर असर पड़ रहा है और LPG की किल्लत बढ़ रही है। यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रियों को बुलाकर इस समस्या का ब्यौरा लिया है और वे ईरान, US और इजराइल के संपर्क में हैं। कुछ देश जंग लड़ रहे हैं और इसका खामियाज़ा पूरी दुनिया भुगत रही है। पूरी दुनिया की इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी बनती है।
सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति की रविवार को समीक्षा की और आम लोगों की खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा समेत महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बैठक की अध्यक्षता की।
सीसीएस की बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभावों से निपटने के लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण के साथ समर्पित रूप से काम करने के लिए मंत्रियों और सचिवों का एक समूह गठित करने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष एक बदलती हुई स्थिति है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने चाहिए। मोदी ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंगों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। सीसीएस की बैठक में आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मध्यम और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।
सीसीएस की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, ‘‘पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा और भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया तथा तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के उपायों पर चर्चा की गई।’’
सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, सीसीएस ने खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा समेत आम आदमी की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया।कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, ऊर्जा, एमएसएमई, निर्यातक, जहाजरानी, व्यापार, वित्त, आपूर्ति और सभी प्रभावित क्षेत्रों पर अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई।
देश के समग्र व्यापक आर्थिक परिदृश्य और भविष्य में उठाए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर किए जा रहे शमन उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस की बैठक की अध्यक्षता की।’’ उन्होंने कहा कि बैठक में अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर व्यापक चर्चा हुई, जिसमें किसानों के लिए उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाना, नए गंतव्यों के लिए निर्यात को बढ़ावा देना और अन्य मुद्दे शामिल हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘हम अपने नागरिकों को संघर्ष के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ सीसीएस की बैठक में किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव और खरीफ मौसम के लिए उनकी उर्वरक की आवश्यकताओं की भी समीक्षा की गई। बयान के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम समय पर उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
इसके मुताबिक भविष्य में उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक उर्वरक स्रोतों पर सीसीएस में चर्चा की गई। बयान के मुताबिक बैठक में जानकारी दी गई कि सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार होने से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी। औद्योगिक क्षेत्रों द्वारा आवश्यक आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई।
बयान के मुताबिक इसी प्रकार, भारतीय वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में नए निर्यात स्थलों की तलाश की जाएगी। कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा अब तक उठाए गए और योजनाबद्ध किए जा रहे शमन उपायों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।
विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कई उपायों को सभी हितधारकों से परामर्श के बाद आने वाले दिनों में तैयार और कार्यान्वित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया। सूत्रों ने बताया कि पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति को देखते हुए कच्चे तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों, तथा बिजली और उर्वरक क्षेत्रों से संबंधित स्थिति की बैठक में समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य निर्बाध आपूर्ति, स्थिर परिवहन और देश भर में कुशल वितरण सुनिश्चित करना था।
सीसीएस की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर सदस्य हैं। हालांकि, रविवार की बैठक के लिए, प्रमुख मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालने वाले कई वरिष्ठ मंत्रियों को आमंत्रित किया गया था।
इनमें कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ,स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (स्वास्थ्य),वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ,रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव , बंदरगाह और जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी , नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव, पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास भी बैठक में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जो राष्ट्रीय चरित्र की एक गंभीर परीक्षा है और इससे निपटने के लिए शांति, धैर्य और जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।