स्कूलों में बच्चों को जंक फूड के नुकसान बताने के साथ शिक्षक पढ़ाएंगे अखबार!, अनिवार्य हो सकता एआई?
By राजेंद्र कुमार | Updated: March 28, 2026 19:46 IST2026-03-28T19:45:10+5:302026-03-28T19:46:08+5:30
सभी 1200 मध्यमिक विद्यालयों में गत दिसंबर को सभी विद्याथियों के लिए अखबार पढ़ना अनिवार्य करने का आदेश दिया गया था. जिसके तहत अब सभी विद्यार्थी प्रार्थना सभा में प्रमुख अखबार पढ़ेंगे.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश की सरकार माध्यमिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए तरह-तरह के प्रयोग कर रही हैं. इसके चलते बच्चों को स्कूल में अखबार पढ़ने को अनिवार्य किया गया है. इसके साथ ही माध्यमिक स्कूलों के दो लाख छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) फॉर ऑल कोर्स अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाने का फैसला किया गया. यही नहीं यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी किए गए नए एकेडमिक कैलेंडर में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, जागरूकता और व्यावहारिक ज्ञान को प्राथमिकता देने के निर्देश शिक्षकों को दिए गए है. शिक्षकों से कहा गया है कि बच्चों में बढ़ती जंक फूड की आदत को नियंत्रित करने और उन्हें पौष्टिक आहार के प्रति प्रेरित करने के लिए जंक फूड के नुकसान बताएं जाए.
इसके साथ ही एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राएं अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे और कठिन शब्दों का अर्थ शिक्षकों से समझेगे ताकि बच्चों की भाषा पर पकड़ मजबूत हो. इस नए सत्र से बच्चों के विद्यालयों में मोबाइल लाने पर पूरी तरह रोक रहेगी.
प्रार्थना सभी अखबार पढ़ेंगे बच्चे
राज्य के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन गुप्ता के अनुसार, प्रदेश के सभी 1200 मध्यमिक विद्यालयों में गत दिसंबर को सभी विद्याथियों के लिए अखबार पढ़ना अनिवार्य करने का आदेश दिया गया था. जिसके तहत अब सभी विद्यार्थी प्रार्थना सभा में प्रमुख अखबार पढ़ेंगे. शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे अखबार में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण कराएं.
उसका अर्थ भी समझाएं. विद्यालय में मोबाइल लाने पर रोक को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह का कहना है कि बच्चों में मोबाइल का अत्याधिक उपयोग उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. बच्चों की आँखों की रोशनी कमजोर होती है और पढ़ाई में भी उनका ध्यान कम लगता है.
इसके अलावा बच्चों में आनलाइन खेम खेलने की आदत भी पढ़ रही हैं. इसलिए बच्चों के हितों का ध्यान रखते हुए विद्यालय में उनके मोबाइल लाने पर रोक लगाने का फैसला किया गया. इस फैसले को कठोरता के साथ लागू करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और मंडलीय शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है.
जंक फूड के दुष्प्रभाव जानेंगे बच्चे
इसी प्रकार स्कूलों में बच्चों को शिक्षक जंक फूड के दुष्प्रभावों के बारे में बताएंगे.इसके लिए जानकारी पूर्ण वीडियो बच्चों को दिखाए जाएंगे और विज्ञान क्लब जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को यह समझाया जाएगा कि पैकेट बंद खाद्य पदार्थों में कौन-कौन से हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। इन्हें खाने से बचा जाए.
इसके साथ ही विद्यार्थियों को खाद्य सामग्री के पैकेट पर लिखी सामग्री सूची पढ़ने और स्वस्थ व अस्वस्थ भोजन की पहचान करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वे पौष्टिक आहार की एक सूची तैयार करें और छात्रों को उसी के अनुरूप टिफिन लाने के लिए प्रेरित करें.
इससे बच्चों में संतुलित आहार की आदत विकसित होगी और उनका शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होगा। इसके अलावा, किशोरावस्था शिक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को इस संवेदनशील आयु से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सके. बच्चों को स्थानीय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक स्थलों का भ्रमण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.
एआई फॉर ऑल कोर्स पढ़ेंगे बच्चे
इसके साथ ही प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों के दो लाख छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) फॉर ऑल कोर्स अनिवार्य रूप से पढ़ाने का भी फैसला किया गया है. राज्य के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के अनुसार, प्रदेश के 1200 राजकीय माध्यमिक स्कूलों में प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों को विभिन्न ट्रेड में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अब पहली बार एआई का पाठ्यक्रम सभी ट्रेड के छात्रों के लिए अनिवार्य किया जा रहा है. भविष्य की तकनीक एआई का ज्ञान विद्यार्थियों को दिया जाना बहुत आवश्यक है.
ऐसे में जिन 1200 राजकीय माध्यमिक स्कूलों में प्रोजेक्ट प्रवीण चलाया जा रहा है, वहां पर छात्रों को एआई के प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा. इसके लिए चार घंटे का विशेष एआई कोर्स प्रशिक्षकों व छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य किया गया है.उप्र के स्कूली शिक्षा ढांचे में नई तकनीक के प्रयोग का ज्ञान छात्रों को देने के लिए यह पहल की जा रही है.