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जम्मू कश्मीर में संपत्ति कर लगाने को लेकर मचा बवाल, सरकार के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे राजनीतिक दल

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 23, 2023 15:36 IST

भाजपा को छोड़ प्रत्येक राजनीतिक और सामाजिक दल प्रदेश में संपत्ति कर लगाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में ऐसे निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ चुनी हुई सरकार या चुने हुए प्रतिनिधियों को ही होना चाहिए।

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ठळक मुद्देप्रशासन द्वारा लगाए संपत्ति कर का श्रीनगर नगर निगम विरोध कर रहा है। भाजपा को छोड़ प्रत्येक राजनीतिक और सामाजिक दल प्रदेश में संपत्ति कर लगाने का विरोध कर रहे हैं।प्रदेश प्रशासन ने अध्यादेश के जरिए एक अप्रैल से संपत्ति कर लगाने का आदेश जारी किया है।

जम्मू। जम्मू कश्मीर में संपत्ति कर लगाने के खिलाफ जबरदस्त विरोध हो रहा है। हालांकि प्रशासन पहली बार संपत्ति कर लगाने के अपने निर्देश के 'फायदे' गिना रहा है। प्रशासन द्वारा लगाए संपत्ति कर का श्रीनगर नगर निगम विरोध कर रहा है। वहीं अब जम्मू नगर निगम के मेयर इसे लागू करने की अपनी घोषणा से पीछे हट गए हैं। उन्होंने निगम के पार्षदों की आधिकारिक बैठक में इसे लागू न करने की बात कही थी।

भाजपा को छोड़ प्रत्येक राजनीतिक और सामाजिक दल प्रदेश में संपत्ति कर लगाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में ऐसे निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ चुनी हुई सरकार या चुने हुए प्रतिनिधियों को ही होना चाहिए।

गौरतलब है कि करीब 28 महीनों की सुगबुगाहट के बाद प्रदेश प्रशासन ने अध्यादेश के जरिए एक अप्रैल से संपत्ति कर लगाने का आदेश जारी किया है। इसके विरोध में राजनीतिक दल सड़कों पर उतर चुके हैं। गुरुवार जम्मू के सभी वकीलों ने भी काम काज छोड़ कर सड़कों पर उनका साथ दिया। जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रधान एमके भारद्वाज इसे जनता विरोधी करार देते हुए कहा कि पहले ही प्रदेश में बाबा का बुलडोजर कहर बरपा रहा था और अब प्रशासन ने जनता पर नया बम फोड़ दिया है।

श्रीनगर पार्षद मोर्चा के प्रधान दानिश शफी बट ने कहा,चुने हुए प्रतिनिधियों से सलाह किए बिना ऐसे आदेश जारी करना गैर कानूनी है। उधर, जम्मू के भाजपा मेयर राजिन्द्र शर्ता चाह कर भी इस आदेश का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंन अभी तक उस वीडियो का खंडन भी नहीं किया है जिसमें उन्होंने दावे के साथ कहा कि वे जम्मू में संपत्ति कर लागू नहीं होने देंगें। इतना जरूर था कि यह पहला ऐसा मुद्दा था जिस पर कश्मीर और जम्मू संभाग के नेता और लोग एकसाथ खड़े थे सिवाय भाजपा नेताओं के। यह बात अलग है कि भाजपा कार्यकर्ता भी अप्रत्यक्ष रूप से इसका विरोध कर रहे हैं।

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