संप्रग शासनकाल ने अर्थव्यवस्था को 10 वर्ष पीछे धकेला: सीतारमण

By भाषा | Updated: October 5, 2021 23:09 IST2021-10-05T23:09:37+5:302021-10-05T23:09:37+5:30

UPA rule pushed economy back by 10 years: Sitharaman | संप्रग शासनकाल ने अर्थव्यवस्था को 10 वर्ष पीछे धकेला: सीतारमण

संप्रग शासनकाल ने अर्थव्यवस्था को 10 वर्ष पीछे धकेला: सीतारमण

रायपुर, पांच अक्टूबर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि 2004 से 2014 तक के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल ने देश को अर्थव्यवस्था के मामले में 10 साल पीछे धकेल दिया था।

सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जो आर्थिक सुधार किए हैं, उनसे लोगों में अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा है।

केंद्रीय मंत्री ने रायपुर के एक होटल में ‘प्रबुद्ध जन संगो​ष्ठि’ को संबोधित करते हुए कहा कि शेयर बाजार में छोटे निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है और वे अब इसमें निवेश कर रहे हैं।

सीतारमण ने कहा कि विपक्ष आरोप लगाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधारों को लेकर बहुत बड़ा काम किया है, जबकि मोदी जी की सरकार को सुधारों की कोई समझ नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष टिप्पणी करता था कि (मोदी सरकार में) विशेषज्ञों से परामर्श करके अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा​, ‘‘आप जानते हैं कि उन 10 वर्षों (संप्रग शासन के दौरान) के दौरान क्या हुआ था। बैंकों को जोरदार झटका लगा था। बाद में जब मोदी सरकार (2014 के मध्य में) सत्ता में आई तब बैंकों में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई और दिखाया गया कि संस्था को चलाया जा सकता है।’’

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लाभ कमा रहे हैं। हमने उनसे एनपीए का बोझ हटाकर एनएआरसीएल (नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड) में डाल दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विशेषज्ञों के होने के बावजूद उन 10 वर्षों (संप्रग शासन के दौरान) में कोई आर्थिक सुधार नहीं किया गया था। उस अवधि के दौरान भारत को अर्थव्यवस्था के मामले में 10 साल पीछे धकेल दिया गया, इसलिए मैं इसे ऐसा दशक कहती हूं, जिसे गंवा दिया गया।’’

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘यदि वर्ष 2014 में श्वेत पत्र जारी होता, तब इन 10 साल में अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर जो कुछ छिपा था, वह सच सामने आ जाता। उन्होंने अर्थव्यवस्था को बहुत खराब स्थिति में छोड़ा था, लेकिन पिछले सात वर्षों से इसमें सुधार के बाद अब लोगों को अर्थव्यवस्था पर विश्वास हो रहा है। बाजार से इसका संकेत मिल रहा है।’’

सीतारमण ने कहा कि मोदी सरकार में आम व्यापारियों, उद्योगों और लोगों के हित में कई सुधार किए गए।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि आम भारतीय शेयर बाजार में जोखिम उठाने से बचता था, लेकिन अब अर्थव्यवस्था में सुधार के कारण भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि मार्च वर्ष 2020 के बाद डीमैट खातों के जरिए शेयर बाजार में निवेश बढ़ा है और म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले छोटे निवेशक अब शेयर बाजार में भी निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब हर महीने करीब नौ-10 लाख डीमैट खाते खोले जा रहे हैं।

सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ने के कारण विदेशी निवेश भी आकर्षित हुआ है। केंद्र सरकार ने स्थिरता दी है और व्यापार में लोगों का भरोसा बढ़ा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कोरोना काल के दौरान मार्च 2019 में किसी को भी अंदाजा नहीं था कि क्या होने वाला है। कैसे इसका सामना करें। हमारे पास इससे निपटने के लिए क्या होना चाहिए, इसका अंदाजा नहीं था। लॉकडाउन लगाया गया। उस समय पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट नहीं थी, जांच के लिए किट नहीं थीं, लेकिन इससे निपटने के लिए कोशिश की गई और सारी ताकत झोंकी गई। बाहर से पीपीई किट मंगाई गईं और हमारे देश में भी इसका निर्माण शुरू हुआ।’’

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने में सभी उद्योगों और आम लोगों ने भी इसमें सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि इस दौरान गरीब भूखा न रहे, इसके लिए राशन दिया गया।

सीतारमण ने कहा कि ऐसे भयावह दौर में प्रधानमंत्री मोदी ने देश को महामारी और आर्थिक संकट सहित अन्य कठिनाइयों से उबारने में जिस कुशलता के साथ प्रयत्न किया, उससे भारतीय नेतृत्व के सार्थक प्रयासों को विश्व मंच पर सराहना मिली है।

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Web Title: UPA rule pushed economy back by 10 years: Sitharaman

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